प्रोजेक्ट पहचान के तहत 1.5 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग, 805 में मिलीं विकासात्मक समस्याएं

महराजगंज।(न्यूज पैच)। जिले में बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय से पहचान और समुचित उपचार सुनिश्चित करने के लिए संचालित प्रोजेक्ट पहचान के तहत अब तक करीब 1.5 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें 805 बच्चे विभिन्न प्रकार की जन्मजात बीमारियों और विकासात्मक समस्याओं से प्रभावित पाए गए हैं। मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह ने मंगलवार को समीक्षा बैठक एवं कार्यशाला के दौरान चिह्नित बच्चों का शीघ्र उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में बच्चों की स्क्रीनिंग, विकासात्मक समस्याओं की पहचान, उपचार की व्यवस्था तथा प्रोजेक्ट पहचान पोर्टल और ऐप के संचालन की तैयारियों की समीक्षा की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय से पहचान कर उनका समुचित उपचार कराया जाए, ताकि उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षकों और प्रभारी अधीक्षकों को स्क्रीनिंग कार्य की नियमित समीक्षा करने तथा चिह्नित बच्चों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रोजेक्ट पहचान के तहत विकसित पोर्टल और ऐप का मंगलवार से ट्रायल शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों की सटीक फीडिंग, प्रभावी निगरानी और उपचार प्रक्रिया को सुगम बनाना है। चिकित्सा अधीक्षकों को आशा, एएनएम और स्क्रीनिंग कार्य में शामिल अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को पोर्टल के इस्तेमाल की जानकारी देने तथा ट्रायल के दौरान सामने आने वाली तकनीकी और संचालन संबंधी समस्याओं से अवगत कराने को कहा गया, ताकि उन्हें दूर कर पोर्टल को औपचारिक रूप से शुरू किया जा सके।
मुख्य विकास अधिकारी ने चिकित्सकों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ), आशा और एएनएम से पोर्टल का उपयोग कर सुझाव एवं फीडबैक देने की अपील की, जिससे इसकी कमियों को दूर कर इसे अधिक सरल और प्रभावी बनाया जा सके।
जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि पोर्टल और ऐप पर ग्राम पंचायत, सीएचओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल स्तर पर डाटा फीडिंग की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से प्रत्येक स्तर के अधिकारी अपने अधीनस्थ स्तरों पर किए जा रहे कार्यों की निगरानी भी कर सकेंगे।
बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के प्रभारी ने बताया कि आरबीएसके टीम, आशा, एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से अब तक लगभग 1.5 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें 805 बच्चे विभिन्न प्रकार की जन्मजात बीमारियों और विकासात्मक समस्याओं से प्रभावित पाए गए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 202 बच्चे जन्मजात हृदय रोग, 121 जन्मजात बहरेपन, 86 डीडीएच और 76 कटे होंठ एवं तालू की समस्या से प्रभावित पाए गए हैं। इसके अलावा डाउन सिंड्रोम, भाषा विकास में देरी, माइक्रोसेफली सहित अन्य विकासात्मक समस्याओं से प्रभावित बच्चों की भी पहचान की गई है।
मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को चिह्नित बच्चों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि प्रत्येक बच्चे की बीमारी के अनुसार उपचार की योजना बनाई जा सके और यह निर्धारित किया जा सके कि उसका इलाज किस स्तर पर कराया जाना है।




