महाव नाले का तटबंध टूटा, 50 एकड़ धान की फसल जलमग्न; किसानों में आक्रोश, सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप

महराजगंज।(न्यूज पैच)। नेपाल में हुई बारिश के बाद महाव नाले का जलस्तर बढ़ने से गुरुवार को बरगदवा गांव के किसानों पर संकट टूट पड़ा। दोपहर के समय गांव के सिवान में शंकर के खेत के समीप महाव नाले का पूर्वी तटबंध लगभग 10 मीटर तक टूट गया। तटबंध टूटते ही तेज बहाव के साथ नाले का पानी आसपास के खेतों में फैल गया, जिससे करीब 50 एकड़ क्षेत्र में रोपी गई धान की फसल जलमग्न हो गई। अचानक आई इस स्थिति से किसानों की मेहनत पर पानी फिरने की आशंका गहरा गई है और फसल के भारी नुकसान की संभावना जताई जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार बुधवार शाम नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई मूसलाधार वर्षा के कारण महाव नाले का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। गुरुवार दोपहर पानी का दबाव बढ़ने पर पहले से जर्जर हो चुका पूर्वी तटबंध बहाव नहीं झेल सका और करीब 10 मीटर तक टूट गया। तटबंध टूटते ही तेज रफ्तार से पानी खेतों में घुस गया और देखते ही देखते धान की रोपी गई फसलें जलमग्न हो गईं। कई किसानों के खेत पूरी तरह पानी में डूब गए, जिससे उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं।
घटना के बाद प्रभावित किसानों में सिंचाई विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिली। किसानों का आरोप है कि हर वर्ष महाव नाले की बाढ़ से बचाव के नाम पर सिल्ट सफाई, तटबंधों की मरम्मत और रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य गुणवत्तापूर्ण नहीं होने के कारण पहली ही तेज बारिश में तटबंध टूट गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते तटबंध पर बने ‘रैट होल’ और ‘रेन कट’ की मरम्मत करा दी गई होती तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती और किसानों की फसलें सुरक्षित रहतीं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि तटबंध टूटने के कई घंटे बाद तक सिंचाई विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे किसानों में विभाग के प्रति और अधिक आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि हर वर्ष बाढ़ के समय ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जाते।
उधर, सूचना मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया। उपजिलाधिकारी नवीन प्रसाद ने बताया कि तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही राजस्व विभाग और सिंचाई विभाग की टीम को मौके पर भेज दिया गया है। प्रभावित तटबंध की मरम्मत कराकर पानी के बहाव को नियंत्रित करने की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही फसल क्षति का सर्वे कराया जाएगा और शासन के नियमानुसार प्रभावित किसानों को राहत दिलाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
स्थानीय किसानों का कहना है कि महाव नाला क्षेत्र में हर वर्ष बाढ़ और कटान की समस्या सामने आती है, लेकिन अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते। किसानों ने प्रशासन से तटबंध की मजबूत मरम्मत कराने, दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।




