डा. राकेश पटेल की आईएएस पद पर हुई पदोन्नति,कृषक के होनहार पुत्र की उपलब्धि पर खुशी से झूमा जनपद
सिसवा विकास खंड के लक्ष्मीपुर एकडंगा के है निवासी,वर्तमान मे एडिशनल कमिश्नर लखनऊ के पद पर है तैनात

महराजगंज।(न्यूज पैच)। जनपद की मिट्टी चिकित्सा शिक्षा खेल और राजनीति के क्षेत्र मे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेर रही है। जनपद के किसान परिवार के लाल ने देश के सर्वश्रेष्ठ पद पर सुशोभित सुर्खिया बटोर रहे है। जनपद के सिसवा विकास खंड के लक्ष्मीपुर एकडंगा मे किसान परिवार मे जन्मे डाक्टर राकेश पटेल ने आईएएस पद पर पदोन्नति पाकर जनपद का नाम रोशन किया है। कृषक चोकट दास के पुत्र राकेश पटेल का परिवार की जडे गांव से जुडी है लेकिन उनके परिवार का शिक्षा से गहरा जुडाव रहा है।
परिवार मे उनके भाई ब्रजेश पटेल एनईआर मे इंजिनियर व डाक्टर गिरिजेश पटेल पूर्व साइंटिस्ट रहे है और अमेरिका मे नौ साल सेवा देते रहे, जो अभी एमएनआईटी मे बायोटेक मे प्रोफेसर है. डाक्टर राकेश पटेल भाईयो के पदचिन्हो पर चलते हुए पीसीएस तक का सफर तय किया। इसके पूर्व उनकी प्रारम्भिक पढाई गांव मे हुई और एकीकृत छात्रावास मे चयनित होकर कक्षा नौ से बारह तक की शिक्षा जुबिली इंका गोरखपुर बीए व एमए डीडीयू गोरखपुर एमफील व पीएचडी जेएनयू से किया। पीसीएस मे चतन के बाद बतौर एसडीएम मेरठ मे ट्रेनिंग पूरी की।
इसके बाद फर्रुखाबाद जौनपुर मे एसडीएम व सीतापुर इटावा मे सीटी मजिस्ट्रेट के रुप मे सेवा दे चुके है। डॉक्टर राकेश पटेल इसके अलावा एडीएम जूरिडिकल व एडीएम सीटी अलीगढ, सीआरओ प्रतापगढ एडीएम एफ आर कासगंज रहे और वर्तमान मे एडिशनल कमीश्नर लखनऊ में सेवा दे रहे है।आईएएस पद मिलने के बाद सोशल मिडिया पर बधाई का तांता लगा हुआ है। इनकी इस उपलब्धि पर र डा नितीश पटेल गौरव सिंह मनोज पटेल डा सागर अदीब मोहसीन अभिषेक सिंह रमेश सिंह प्रधान प्रतिनिधि रमेद्र पटेल बैजनाथ पटेल अजय पटेल सुनील पटेल प्रमोद पटेल अरुण पटेल पुष्पेद्र पटेल अंकित पटेल देवेंद्र पटेल अविनाश चौधरी आदि लोगो ने बधाई दी है
हिंदी साहित्य के कवि लेखक और फिल्म समीक्षक है राकेश ‘कबीर‘
आईए एस के पद पर पदोन्नति पाने वाले डाक्टर राकेश ‘कबीर’ समकालीन हिंदी साहित्य के चर्चित कवि, लेखक और फिल्म समीक्षक हैं। उन्होंने अपनी सशक्त रचनात्मकता और वैचारिक लेखन के माध्यम से साहित्य एवं सिनेमा की दुनिया में विशिष्ट पहचान बनाई है। अब तक उनके चार कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी कविताओं के केंद्र में लोकजीवन, नदी और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विषय उपस्थित हैं। वे अपनी रचनाओं में लोक-संस्कृति, जनजीवन की संवेदनाओं, नदियों के बदलते स्वरूप तथा प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े संकटों को गहरी मानवीय दृष्टि के साथ अभिव्यक्त किया है।
राकेश ‘कबीर’ के कविता-संग्रहों को आधार बनाकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय तथा दिल्ली विश्वविद्यालय और झाँसी विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शोध कार्य संपन्न हो चुके हैं। यह उनकी साहित्यिक प्रासंगिकता, वैचारिक गहराई और व्यापक स्वीकृति का प्रमाण है। समकालीन हिंदी कविता में वे ऐसे रचनाकार के रूप में स्थापित हैं, जिनकी काव्य-दृष्टि लोक, प्रकृति और मनुष्य के अंतर्संबंधों को नए अर्थों में उद्घाटित करती है।




