21 साल पुराने हत्याकांड में फैसला आते ही सिविल कोर्ट परिसर में हाईवोल्टेज ड्रामा
निर्णय से आहत मृतक के परिजन पेड़ पर चढ़े, फौजी भाई ने लगाई छलांग

महराजगंज।(न्यूज पैच)। सिविल कोर्ट महराजगंज परिसर सोमवार को उस समय अचानक अफरा-तफरी और तनाव का केंद्र बन गया, जब 21 वर्ष पुराने बहुचर्चित हत्या मामले में न्यायालय द्वारा आरोपितों को निर्दोष करार दिए जाने के बाद मृतक पक्ष के परिजनों ने विरोध स्वरूप हाईवोल्टेज ड्रामा शुरू कर दिया। न्यायालय के फैसले से आहत मृतक कन्हैया पहलवान के भाई लक्ष्मण यादव और पुत्र टूटू यादव कोर्ट परिसर स्थित एक पीपल के पेड़ पर चढ़ गए। घटना की जानकारी मिलते ही न्यायालय परिसर में भारी भीड़ जुट गई। पुलिस प्रशासन, अधिवक्ता और मुवक्किल मौके पर पहुंच गए, जिससे काफी देर तक हंगामे जैसी स्थिति बनी रही।
मृतक पक्ष के परिजनों के अनुसार थाना पनियरा क्षेत्र के मौलागंज निवासी कन्हैया पहलवान की 24 जुलाई 2005 को कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित चेहरी के पास बलिया पुल के समीप गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद मृतक के पिता रामअवध यादव की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की थी। जांच के उपरांत पुलिस द्वारा सात आरोपितों के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
बताया गया कि लंबे समय तक चले मुकदमे की सुनवाई के दौरान सात आरोपितों में से चार की मृत्यु हो चुकी थी। शेष तीन आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में सुनवाई चल रही थी। सोमवार को न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद तीनों आरोपितों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।
फैसला सुनते ही मृतक पक्ष के परिजन भावुक हो उठे और विरोध स्वरूप कोर्ट परिसर में स्थित पीपल के पेड़ पर चढ़ गए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। स्थिति को संभालने के लिए तहसीलदार पंकज शाही, नायब तहसीलदार देश दीपक त्रिपाठी, पुलिस बल एवं क्रेन के साथ मौके पर पहुंचे और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा घेरा बना दिया गया।
काफी देर तक चले समझाने-बुझाने के बाद अधिवक्ताओं ने मृतक के पुत्र टूटू यादव को न्यायालय के निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प बताया, जिसके बाद वह पेड़ से नीचे उतर आया। हालांकि इसी दौरान जब क्रेन को पेड़ की ओर बढ़ाया गया तो मृतक के फौजी भाई लक्ष्मण यादव ने अचानक पेड़ से छलांग लगा दी।
घटना के बाद कुछ समय तक कोर्ट परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल हालात को नियंत्रित किया। मौके पर मौजूद लोगों के बीच इस घटना को लेकर देर तक चर्चा होती रही।
करीब दो दशक पुराने इस चर्चित हत्याकांड के फैसले और उसके बाद हुए घटनाक्रम ने एक बार फिर न्यायालय परिसर को सुर्खियों में ला दिया है।




