… तो क्या रिकार्ड कायम करने को उतावली है ट्रैफिक पुलिस, चालान से नगर मे चलना हुआ मुश्किल
महराजगंज में वाहन जांच अभियान पर उठे सवाल

महराजगंज। (न्यूज पैच)। जनपद में इन दिनों चल रहे सघन वाहन जांच और चालान अभियान को लेकर आम जनता में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। शहर से लेकर कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक लगभग हर प्रमुख चौराहे पर पुलिस द्वारा लगातार वाहन चेकिंग और चालान की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि यातायात नियमों का पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन अब लोगों का आरोप है कि यह अभियान नियम पालन से अधिक राजस्व वसूली और मानसिक उत्पीड़न का माध्यम बनता जा रहा है।
जनपद के लोगों का कहना है कि पहले ही डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और आर्थिक परेशानियों से आम आदमी जूझ रहा है, वहीं घर से निकलते ही हर चौराहे पर वाहन जांच और चालान का सामना करना पड़ रहा है। कई वाहन स्वामियों का आरोप है कि एक ही वाहन का अलग-अलग स्थानों पर बार-बार चालान किया जा रहा है, जिसकी जानकारी उन्हें बाद में मोबाइल संदेश के जरिए मिल रही है। इससे लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो जनपद के थानों को अधिक से अधिक चालान करने का लक्ष्य दिया गया है। यही वजह है कि जगह-जगह सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर बिना समुचित पार्किंग व्यवस्था और स्पष्ट सूचना बोर्ड के भी चालान किए जा रहे हैं। इस मुद्दे को पहले भी व्यापारी संगठनों और पत्रकारों द्वारा उठाया जा चुका है।
सोशल मीडिया पर भी इस अभियान के खिलाफ नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ-साथ सत्ताधारी दल के स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी चालान व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब राजनीतिक कार्यकर्ता तक इस कार्रवाई से परेशान हैं, तो आम जनता की स्थिति सहज ही समझी जा सकती है।
चर्चा यह भी है कि कुछ पुलिसकर्मी प्रभावशाली लोगों, व्यापारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाने के लिए चालान का सहारा ले रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने भी इस मुद्दे को और हवा दे दी है, जिसमें एक व्यक्ति कथित तौर पर बार-बार चालान से परेशान होकर विरोध करता दिखाई दे रहा है। लेकिन उक्त वायरल वीडियो की पुष्टि न्यूज पैच नहीं करता है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह अभियान वास्तव में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए चलाया जा रहा है या फिर केवल राजस्व बढ़ाने की कवायद बनकर रह गया है।
सुनील कुमार श्रीवास्तव




