जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने जिला कारागार का किया निरीक्षण, महिला बंदियों की सुनी समस्याएं

महराजगंज।(न्यूज पैच)। माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में मंगलवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, महराजगंज के सचिव सुनील कुमार नागर ने जिला कारागार का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने महिला एवं बाल बैरकों का जायजा लिया, बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी।
दोपहर 1:30 बजे शुरू हुए निरीक्षण के दौरान सचिव ने सबसे पहले बाल बैरक का निरीक्षण किया। वहां निरुद्ध बंदियों की आयु संबंधी जानकारी प्राप्त की गई। निरीक्षण में बाल बैरक में कोई भी किशोर बंदी नहीं पाया गया। इसके बाद उन्होंने महिला बैरक का निरीक्षण कर प्रत्येक महिला बंदी से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनकी समस्याओं की जानकारी ली।
महिला बंदियों द्वारा बताई गई समस्याओं के समाधान के लिए सचिव ने जेल अधीक्षक को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बंदियों को बताया कि जिन विचाराधीन बंदियों के पास अपने मुकदमे की पैरवी के लिए अधिवक्ता नियुक्त करने की आर्थिक क्षमता नहीं है, वे जेल अधीक्षक के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रार्थना पत्र भेज सकते हैं। ऐसे पात्र बंदियों को प्राधिकरण की ओर से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
निरीक्षण के दौरान बैरकों, रसोई और अन्य व्यवस्थाओं की साफ-सफाई का भी निरीक्षण किया गया। सचिव ने कारागार परिसर की स्वच्छता व्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए जेल प्रशासन को इसे निरंतर बनाए रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण में डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल आशुतोष पाण्डेय, सहायक लीगल एड डिफेंस काउंसिल ज्ञानेन्द्र कुमार मिश्र एवं नौशाद आलम, जेल अधीक्षक बी.के. गौतम, प्रभारी जेलर रत्ना सिंह, डिप्टी जेलर अविनाश, राम उग्गन तथा जेल चिकित्सक डॉ. श्याम बाबू सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि बंदियों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा जरूरतमंदों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना प्राधिकरण की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर जिला कारागार का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते हैं।




