सावन के गीत व कजरी हो गये बीते दिनों की यादें
सावन का पहला सोमवार आज

पनियरा(महराजगंज) न्यूज पैच। सावन का महीना पवन करे शोर, जियरा रे झूमे मस्ती में, जैसे मनवा नाचे मोर… आदि गाने व कजरी की गूंज सहसा ही सावन मास का एहसास दिलाते थे। सावन का महीना शुरू होते ही गांव के पेड़ों पर झूले टंग जाया करते थे। उस पर महिलाएं व लड़कियां झूला झूलते हुए सावन के ये गीत गुन-गुनाती रहती थीं।
इस महीने में महिलाएं कजरी के गीत भी गाया करती थीं। अधिकतर शादीशुदा महिलाएं विशेषकर सावन के महीने में झूला झूलने, गीत गाने व इस माह का भरपूर आनन्द उठाने के लिए अपने मायके आ जाया करती थीं। उल्लेखनीय है कि सावन महीने के हर सोमवार को लोग व्रत रहकर मन्दिरों पर पूजा-अर्चना किया करते थे। सावन के गीत व कजरी की गूंज चारों तरफ सुनाई देती थी। यह सब वैसे भी पुरानी यादें बनता जा रहा है । सावन का पहला सोमवार आज 3 अगस्त को पड़ा है।कुछ लोग सावन के सोमवार को व्रत तो रह रहे हैं।इस माह में जहां मंदिरों पर भारी भीड़ इकट्ठा होती थी, लोग पूजा-अर्चना करते थे अब वहां सूना सूना सा लगने लगा है। इस माह में पनियरा के बभनौली स्थित शिव मंदिर पर हर वर्ष ऐतिहासिक भीड़ जुटती थी किन्तु इस साल मंदिर सुनसान पड़ा है।
इस बावत श्रीमती पूनम सिंह, बबिता सिंह, रितू गुप्ता, माया वर्मा व किसनावती सहित तमाम महिलाओं से सावन के झूले व उनके गीतों के बारे में पूछे जाने पर लोगों ने कहा कि ये सब अब बीते दिनों की सिर्फ यादें बन कर रह गयी हैं। अब कहां कौन झूला डालता है और कजरी व सावन के गीत गाता है। सब अपने-अपने कामों में व्यस्त हैं।
आफताब आलम खां
पनियरा महराजगंज




