औषधीय वैज्ञानिक एवं धार्मिक समृद्धि का प्रतीक है सीता अशोक वृक्ष : अश्विनी कुमार
स्त्री रोगों के लिए रामवाण है सीता अशोक वृक्ष : डा. अजीत कुमार श्रीवास्तव, पर्यावरणीय दृष्टिकोण से समृद्ध है सीता अशोक वृक्ष : डा. एस. पी. सिंह, उत्तर प्रदेश का राजकीय वृक्ष है सीता अशोक

सिन्दुरिया, महराजगंज।(न्यूज पैच)। सीता अशोक (सराका इंडिका) भारत का एक अत्यंत पवित्र एवं औषधीय वृक्ष है। यह उत्तर प्रदेश का राजकीय वृक्ष है। इसका पुष्प महापुष्प कहलाता है जो उड़ीसा का राजकीय पुष्प है। सीता अशोक को असली अशोक माना जाता है, जो महालक्ष्मी का स्वरूप है तथा वास्तुशास्त्र की दृष्टि से यह उत्तर दिशा में लगाया जाता है। इसका सदाबहार स्वरूप, सुगंधित नारंगी-लाल पुष्प तथा घनी हरियाली इसे सौंदर्य और स्वास्थ्य दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बनाते हैं।
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार इसकी छाल, पत्तियों एवं पुष्पों में टैनिन, फ्लेवोनॉयड, ग्लाइकोसाइड तथा अन्य जैव-सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें सूजन-रोधी, एंटीऑक्सीडेंट एवं रोगाणुरोधी गुण विद्यमान हैं। आयुर्वेद में अशोक को स्त्री-रोगों की श्रेष्ठ औषधि माना गया है। उक्त बातें दिग्विजयनाथ इंटर कॉलेज, दिग्विजयनाथ बालिका इंटर कॉलेज एवं गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ पीजी कॉलेज के संयुक्त तत्त्वावधान में विद्यार्थियों को 111 सीता अशोक वृक्ष के बीज तथा बैग वितरण के अवसर पर गोरखपुर के सामाजिक कार्यकर्ता अश्विनी कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि इसकी छाल से निर्मित अशोकारिष्ट अत्यधिक मासिक स्राव, श्वेत प्रदर, गर्भाशय संबंधी विकारों तथा शारीरिक दुर्बलता में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। यह रक्तस्राव को नियंत्रित करने, गर्भाशय को सुदृढ़ बनाने तथा शरीर को बल प्रदान करने में सहायक माना जाता है। इसके पेट एवं चल को हृदय रोग त्वचा रोग एवं बवासीर के रोगी वैद्य से परामर्श लेकर उपयोग कर सकते हैं ।
इस अवसर पर महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान एवं बागवानी विभाग के विशेषज्ञ डा. अजीत कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यह आम नीम बरगद आदि की तरह घनी छाया वाला बड़ा वृक्ष होता है तथा इसका औषधीय गुण स्वाभाविक ठंडा होता है । स्त्री रोगों के लिए अशोक वृक्ष रामवाण है।धार्मिक दृष्टि से अशोक वृक्ष का विशेष स्थान है। रामायण के अनुसार माता सीता ने लंका में अशोक वाटिका में ही निवास किया था, इसलिए इसे “सीता अशोक” कहा जाता है।
भारतीय संस्कृति में यह वृक्ष दुःख, भय और शोक को दूर करने तथा सुख, समृद्धि एवं मंगल का प्रतीक माना जाता है। अनेक मंदिरों, आश्रमों और उद्यानों में इसका रोपण शुभ माना जाता है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के वरिष्ठ सदस्य डा . एस.पी. सिंह ने कहा कि सीता अशोक वृक्ष के बीज एवं बैग का वितरण पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रयास है। हम कोई भी पौधे लगाए तो उनको खूबियों के संबंध में बीज रोपण से लेकर पौधे की प्रगति तक जिज्ञासु रहें। सीता अशोक वृक्ष औषधीय, वैज्ञानिक, आयुर्वेदिक, पर्यावरणीय तथा धार्मिक सभी दृष्टियों से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है और इसका संरक्षण एवं संवर्धन हमारी सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए आवश्यक है।
आज विद्यार्थियों को सीता अशोक वृक्ष का बीज तथा ग्रो बैग वितरित किया गया निश्चित ही यह पर्यावरण संरक्षण में वरदान साबित होगा। इस अवसर पर तीनों संस्थाओं के शिक्षक शिक्षिका कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित रहे।
प्रमोद कुमार मौर्य




