वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमावर्ती गांवों के विकास को मिलेगी नई गति, डीएम ने अधिकारियों को दिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

महराजगंज।(न्यूज पैच)। भारत-नेपाल सीमा से लगे गांवों के समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से संचालित केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज योजना को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार देर शाम जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने कैंप कार्यालय में योजना के अंतर्गत चयनित ग्राम पंचायतों के कंसल्टिंग इंजीनियरों के साथ समीक्षा बैठक कर विकास कार्यों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए तैयार होने वाली प्रत्येक परियोजना व्यवहारिक, गुणवत्तापूर्ण और ग्रामीणों की वास्तविक आवश्यकताओं पर आधारित होनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सीमावर्ती गांवों को सामाजिक, आर्थिक और अवसंरचनात्मक दृष्टि से इतना सशक्त बनाना है कि वहां के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक चयनित ग्राम पंचायत का विस्तृत सर्वेक्षण कर ही विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया जाए, ताकि कोई भी आवश्यक विकास कार्य प्रस्ताव से छूटने न पाए।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन, उत्सव भवन, अन्नपूर्णा भवन, पुस्तकालय, स्वयं सहायता समूहों के लिए कार्यशील शेड, आंगनबाड़ी केंद्र, खेल मैदान तथा अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में इन सुविधाओं का अभाव है या जहां मौजूदा परिसंपत्तियां जर्जर स्थिति में हैं, उन्हें प्रस्ताव में प्रमुखता से शामिल किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल भवन निर्माण पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक सार्वजनिक परिसंपत्ति तक सुगम संपर्क मार्ग उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। इसके लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) के साथ समन्वय स्थापित कर सभी आवश्यक सड़कों एवं संपर्क मार्गों के प्रस्ताव भी तैयार किए जाएं। साथ ही प्रत्येक वाइब्रेंट गांव में आकर्षक प्रवेश एवं निकास द्वार विकसित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे गांवों की अलग पहचान बनेगी और उनकी विशिष्टता भी प्रदर्शित होगी।
बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को भी विशेष महत्व दिया गया। जिलाधिकारी ने सभी सार्वजनिक भवनों तथा गांवों के प्रवेश एवं निकास स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे एवं पब्लिक एड्रेस सिस्टम (पीए सिस्टम) स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे ग्रामीणों की सुरक्षा मजबूत होगी और किसी भी आपात स्थिति में सूचना का त्वरित प्रसारण संभव हो सकेगा।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि सभी प्रस्ताव तैयार करते समय भूमि की उपलब्धता और उपयुक्तता का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि भविष्य में निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी को निर्देश दिया गया कि सभी स्वीकृत प्रस्तावों को निर्धारित समय सीमा के भीतर वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम पोर्टल पर अपलोड कराया जाए, जिससे स्वीकृति एवं क्रियान्वयन की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप जनपद के सीमावर्ती गांवों को लद्दाख के चुमुर गांव की तर्ज पर विकसित करने के लिए सभी संबंधित विभाग समन्वित कार्ययोजना बनाकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि यदि सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ कार्य करेंगे तो सीमावर्ती गांव विकास की नई मिसाल बनेंगे और वहां के लोगों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
बैठक में जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी निरंकार, जिला सूचना अधिकारी प्रभाकर मणि त्रिपाठी सहित संबंधित ग्राम पंचायतों के कंसल्टिंग इंजीनियर एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।




