बीती रात बांकी रेंज के सतगुर में अवैध रूप से काटे गए आम के हरे-भरे पेड़

पनियरा, महराजगंज।(न्यूज पैच)। दक्षिण गोरखपुर वन प्रभाग के बांकी रेंज के ग्राम सभा सतगुर में पर्यावरण संतुलन के नियमों को ताक पर रखकर बीती रात लकड़ी ठेकेदारों ने आम के हरे-भरे फलदार कई पेड़ो को काटकर रातों रात उसकी तस्करी करने का मामला प्रकाश में आया है। इस सम्बन्ध में वांकी रेंज के नवागत वन क्षेत्राधिकारी हरिकेश नायक ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है ,जाँच कर कार्यवाही की जा रही है। मौके पर आम के पेड़ों की जड़ आ( बूट ) ही है।पेड़ काटने वाले आरोपी लकड़ी को गायब कर दिया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी जहां अधिक से अधिक वृक्षारोपण का अभियान चला रहे है,वही पर वन माफियाओं द्वारा अवैध रूप से आम के लहलहाते फल लगें पेड़ों को काटा जाना विभाग की निष्पक्षता पर सवालिया निशान है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे खेल से विभाग वाकिफ होने के बावजूद पूरी तरह लाचार और मूकदर्शक बना हुआ है, जिससे प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों का अस्तित्व संकट में आ गया है।
प्रतिबंध के बाद भी बेखौफ वन माफिया शासन द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बनाए रखने के लिए फलदार और हरे-भरे पेड़ों के कटान पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाने के बाद भी अपना काम करने में कामियाब हो जा रहे है। इसके बावजूद, क्षेत्र में सक्रिय वन माफिया नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, बिना किसी वैध परमिट और अनुमति के रातों-रात और कभी-कभी दिन के उजाले में भी क्षेत्र में आम के भारी-भरकम पेड़ों को काटकर ठिकाने लगाया जा रहा है। लकड़ी माफिया इन कीमती लकड़ियों को औने-पौने दामों में आरा मिलों और अन्य ठिकानों पर खपा रहे हैं।
लाचार और बेअसर साबित हो रहा वन विभाग
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ों के अवैध कटान की सूचना कई बार क्षेत्रीय वन कर्मियों और जिम्मेदार अधिकारियों को दी गई। लेकिन, विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। अधिकारियों की यह निष्क्रियता और लाचारी कई तरह के गंभीर सवाल खड़े करती है। क्षेत्र में चर्चा है कि वन विभाग की कथित सुस्ती या कथित साठगांठ के चलते ही यह अवैध धंधा बेधड़क फल-फूल रहा है।
पर्यावरण को पहुंच रहा भारी नुकसान
गर्मियों के इस मौसम में जहां एक तरफ सरकार वृक्षारोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संतुलन बचाने का कार्य कर रही है, वहीं दूसरी तरफ वर्षों पुराने ऑक्सीजन देने वाले और फलदार आम के पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है। इससे न केवल क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि भीषण गर्मी में राहगीरों और पशु-पक्षियों के लिए छांव का संकट भी खड़ा हो गया है।
आफताब आलम खां
पनियरा महराजगंज




