तथ्य पूरे होने पर एआई का उपयोग मददगार
संक्षित जानकारी होने पर एआई का उपयोग बढ़ा सकता है समस्या एआई का पत्रकारिता में उपयोग विषय पर न्यूज पैच के संपादक सुनील कुमार श्रीवास्तव की विशेष टिप्पणी

महराजगंज। (न्यूज पैच)। वर्तमान समय में एआई (आर्टीफिसियल इंटेलिजेंस) का उपयोग बढ़ा है। खासकर मीडिया के क्षेत्र में इसका उपयोग धडल्ले से हो रहा है। इसमें समझने वाली बात है की एआई को अगर पर्याप्त तथ्य मिलेंगे तो उसे बेहतर बना सकता है। वहीं दूसरी ओर कम तथ्य एआई को मिला तो समस्या बढ़ जाएगी। इसके उपयोग में सचेत रहने की जरूरत है। तथ्य पूरे होने पर एआई का उपयोग काफी मददगार होता है।
एआई को लेकर तमाम भ्रांतियां भी हैं। इसके बारे में पहले बेहतर ढंग से जानने की जरूरत है। मानव उपयोग कम करने और समयवद्व काम करने के लिए इसका उपयोग बेहतर हो सकता है। क्योंकि, एआई किसी भी तथ्य कम समय बेहतर ढंग से बना सकता है। मीडिया इंडस्ट्री के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी एआई के उपयोग से बेहतर काम करने का प्रयास जारी है। उदाहरण के लिए अगर कहीं दुर्घटना हो गई तो सामान्य रूप से एआई को देने पर गलत जानकारी मिल सकती है। ऐसे में कब, क्यों, कहां, कैसे आदि को सहेजते हुए तथ्य पूरे समेटकर एआई को देने पर काम बेहतर दिखेगा। इसमें समय की बचत होगी। जानकार बताते हैं कि गूगल पर दर्ज जानकारी के आधार पर ही एआई काम करती है। इस वजह से इसमें बेहतर काम करने के लिए तथ्यों को एकत्र करने की जरूरत है। एआई का उपयोग अगर ठीक से नहीं हुआ तो जानकारी गलत दर्ज हो जाती है। इस वजह से सचेत रहने की जरूरत है। एआई का उपयोग बढ़ने मैनपावर की कमी नहीं हो रही है। खासकर इसमें संपादन सटीक हो जाता है। सभी तथ्य बेहतर ढंग से शामिल रहे तो कापी बेहतर हो जाती है। ऐसे में एआई के उपयोग को लेकर बेहतर सावधानी बरतने की जरूरत है।
इसमें छोटी सी चूक समस्या को बढ़ा सकती है। किसी भी तथ्य को बेहतर करने के लिए उसमें सटीक जानकारी और सभी जरूरी विंदुओं का समावेश जरूरी होता है। वर्तमान में देखा जा रहा है की एआई का उपयोग जैसे तैसे करके जानकारी गलत पहुंचा दी जा रही है। इससे काम कराने के लिए स्वयं भी अक्लमंद होना नितांत आवश्यक है। कोई भी इसे लेकर थोड़ी सी लापरवाही की तो समस्या बढ़ सकती है। आजकल नौसीखिए अपने अल्प ज्ञान को बेहतर करने के लिए मकसद से एआई का उपयोग करते हैं। उनकी ओर से किए काम एआई से होने की जानकारी हो जाती है। ऐसे तथ्य परोस दिए जाते हैं, जो कोई भी बेहतर लिखने वाला व्यक्ति उन शब्दों का उपयोग नहीं करता है। सटीक जानकारी होने के कारण मामला पकड़ जाता है। वहीं इसके दूसरे पहलू को समझना होगा।
एआई का उपयोग कई मायने में बेहतर है। इससे समय की बचत के साथ संपादन भी ठीक से हो जाता है। यूट्यूब और पोर्टल संचालक एाअई का उपयोग अधिक कर रहे हैं। क्योंकि उनके पास श्रम शक्ति कम होती है। ऐसे में उनकी ओर से काम बेहतर करने के लिए एआई का उपयोग किया जा रहा है। एआई ऐसी तकनीकी हो चुकी है जिससे हर कोई अपने काम को आसान करने में जुटा है। सोशल मीडिया एक्टीविस्ट से लेकर नेताओं के पीआर का काम देखने वाले इसका उपयोग धडल्ले से कर रहे हैं। इसमें उनको बेहतर कंटेंट के साथ समयवद्व काम पूरा हो जाने की गारंटी रहती है। किसी भी तथ्य को बेहतर बनाने के लिए एआई एक बेहतर हथियार बन चुका है। खासकर युवा पीढ़ी का झुकाव इसकी ओर अधिक है।
मनोवैज्ञानिकों की नजर में एआई का बढ़ता उपयोग मनुष्य की बौद्विक क्षमता के क्रियाशीलता को कम कर रहा है। कोई काम करने में मानव मस्तिष्क के सोचने का तरीका अलग होता है। वहीं मशीन पहले से तय तथ्यों के आधार पर ही अपना काम करती है। इस वजह से इसके अंतर को समझना होगा। अगर आने वाले दिनों में एआई का उपयोग अधिक हुआ तो इसके फायदे होने के साथ नुकसान को भी झेलने के लिए हर व्यक्ति को तैयार रहना पड़ेगा। इससे मानव मस्तिष्क को काम करने की क्षमता कम होगी। यह ठीक संकेत नहीं हैं। वहीं चार लोगों का काम एक व्यक्ति कर देगा तो बेरोजगारी भी बढ़ने की प्रबल संभावना रहेगी।
एआई के बढ़ते उपयोग को देखते हुए इसके दोनों पहलुओं को देखने व समझने की जरूरत है।




