हाउस अरेस्ट से आंदोलन नहीं रुकेगा, सरकार जनता के सवालों का जवाब दे: गोविन्द मिश्रा
कांग्रेस की ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में विनोद सिंह ने कहा—दिल्ली जाने से रोकना सरकार के डर को दर्शाता है; मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता को लेकर उठाई गईं मांगें

महराजगंज।(न्यूज पैच)। ‘वोट चोरी’ और मतदाता अधिकारों के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए महराजगंज में कथित हाउस अरेस्ट की कार्रवाई का विरोध किया। जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से सोमवार को ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में युवा हल्ला बोल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता गोविन्द मिश्रा ने दावा किया कि उन्हें 9 अक्टूबर से घर में नजरबंद रखा गया है। उनके अनुसार, 12 अक्टूबर को हाउस अरेस्ट का चौथा दिन था। वहीं, जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष विनोद सिंह और कोषाध्यक्ष कपिल देव शुक्ला ने कहा कि उन्हें 10 अक्टूबर से घर से बाहर निकलने से रोका जा रहा है।
गोविन्द मिश्रा ने कहा, “सरकार मुझे घर में कैद कर सकती है, लेकिन मेरी आवाज को कैद नहीं कर सकती। बिना किसी स्पष्ट कारण, नोटिस या लिखित आदेश के चार दिनों से मुझे घर से बाहर निकलने से रोका जा रहा है। अगर सरकार को ‘वोट चोरी’ के सवाल गलत लगते हैं तो तथ्यों और दस्तावेजों के साथ जवाब दे, आंदोलनकारियों को हाउस अरेस्ट क्यों कर रही है?”
उन्होंने कहा कि हाउस अरेस्ट से आंदोलन नहीं रुकेगा और राहुल गांधी के नेतृत्व में लोकतंत्र एवं मतदाता अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी।
‘आंदोलन करना लोकतांत्रिक अधिकार’
जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष विनोद सिंह ने कहा कि आंदोलन करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने गोविन्द मिश्रा को दिल्ली जाने से रोके जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को विरोध की आवाज दबाने के बजाय उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का पहरा लगाकर लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।
जिला कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष कपिल देव शुक्ला ने कहा कि हाउस अरेस्ट और पुलिस के दबाव से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल नहीं टूटेगा। उनके मुताबिक, शांतिपूर्ण आंदोलन और जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाना लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है।
चुनाव प्रक्रिया को लेकर रखीं पांच प्रमुख मांगें
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें महराजगंज में कथित तौर पर बिना नोटिस और स्पष्ट कानूनी आधार के की जा रही हाउस अरेस्ट जैसी कार्रवाई समाप्त करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वर्ष 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम को रद्द करने की मांग शामिल रही।
इसके अलावा, नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तत्काल निलंबित करने तथा विपक्ष के दावे के अनुसार मतदाता सूची से हटाए गए 13.30 करोड़ नामों को बहाल करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने सभी चुनावों में ईवीएम के स्थान पर मतपत्र से मतदान की व्यवस्था बहाल करने और पिछले दो वर्षों में हुए विधानसभा चुनावों की निष्पक्ष समीक्षा कराने की भी मांग उठाई। उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, दिल्ली और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के चुनावों का उल्लेख किया।
‘मतदाता के वोट का सम्मान लोकतंत्र की बुनियाद’
गोविन्द मिश्रा ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतकर सत्ता में आने का नाम नहीं है, बल्कि जनता के वोट का सम्मान, मतदाता अधिकारों की रक्षा, सरकार से सवाल पूछने की आजादी और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार भी इसकी बुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की तैनाती से जनता के सवालों को दबाया नहीं जा सकता।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला कांग्रेस कमेटी के शेषमणि गुप्ता, अफजल अब्बासी, अकील अहमद सहित अन्य कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। ऑनलाइन माध्यम से जुड़े मीडिया कर्मियों ने भी नेताओं से विभिन्न मुद्दों पर सवाल-जवाब किए।




