निजी विद्यालयों पर एकतरफा दबाव का इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस ने किया विरोध
संगठन ने कहा—दोनों पक्षों को सुनकर तथ्यों और नियमों के आधार पर हो निष्पक्ष जांच

महराजगंज।(न्यूज पैच)। निजी विद्यालय में फीस जमा न करने के कारण छात्रा को परीक्षा से वंचित किए जाने के आरोप से जुड़े मामले में इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस ने विद्यालय प्रबंधन का पक्ष सुने बिना बनाए जा रहे दबाव पर आपत्ति जताई है। संगठन ने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान एकतरफा कार्रवाई के बजाय तथ्यों, नियमों और दोनों पक्षों को सुनकर किया जाना चाहिए।
इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस के महासचिव जीवेश मिश्रा ने कहा कि विद्यालय संचालन में फीस का निर्धारण और निर्धारित समय पर शुल्क जमा कराना सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है। शुल्क बकाया होने की स्थिति में विद्यालयों के पास नियमानुसार शुल्क की वसूली के लिए वैधानिक उपाय अपनाने का अधिकार है। न्यायालयों के पूर्व के निर्णयों में भी निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों के वैध शुल्क की वसूली के अधिकार को स्वीकार किया गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 विद्यालयों की शुल्क व्यवस्था के संबंध में प्रावधान करता है। वहीं, RTE Act के तहत कक्षा 8 तक के बच्चों के संबंध में विद्यार्थियों के अधिकारों और विद्यालयों की जिम्मेदारियों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है। इसलिए किसी भी शुल्क विवाद में विद्यालय और अभिभावक दोनों को कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। वित्तीय कठिनाई होने पर अभिभावकों को भी विद्यालय प्रबंधन के समक्ष अपनी स्थिति रखते हुए संवाद और समाधान का प्रयास करना चाहिए।
जीवेश मिश्रा ने कहा कि यदि किसी अभिभावक को फीस अथवा विद्यालय की किसी व्यवस्था से आपत्ति है, तो उसके समाधान के लिए निर्धारित प्रक्रिया का सहारा लिया जाना चाहिए। संबंधित अधिकारी को भी शिकायत पर कार्रवाई से पहले विद्यालय प्रबंधन और अभिभावक दोनों का पक्ष सुनकर निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। केवल एक पक्ष की शिकायत के आधार पर विद्यालय पर दबाव बनाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि निजी स्कूल प्रबंधक लगातार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और विद्यालयों के शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में बिना पूरे तथ्यों को सामने रखे निजी विद्यालयों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने वाली खबरों से विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों में हताशा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव विद्यालय के सकारात्मक प्रदर्शन और शैक्षणिक वातावरण पर पड़ने की आशंका रहती है।
उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय केवल शुल्क लेने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य और परिवारों की परिस्थितियों को भी समझते हैं। अनेक विद्यालय जरूरतमंद विद्यार्थियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हैं और विशेष परिस्थितियों में उनकी शिक्षा जारी रखने के लिए सहयोग भी करते हैं।
इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस के अध्यक्ष दशरथ गुप्ता ने कहा कि निजी विद्यालय शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और विद्यालय अपने संस्थानों का संचालन नियम, अनुशासन और निर्धारित प्रशासनिक व्यवस्थाओं के अनुसार करते हैं। किसी भी विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में अनावश्यक हस्तक्षेप या एकतरफा दबाव उचित नहीं है। अभिभावकों और विद्यालयों के बीच विवादों का समाधान आपसी संवाद और तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संगठन किसी भी विद्यालय के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार की स्थिति में उसके पक्ष को मजबूती से रखेगा। साथ ही, संगठन का उद्देश्य अभिभावकों और विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि विवादों का समाधान सौहार्दपूर्ण और नियमसम्मत तरीके से हो।
जीवेश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि अभिभावक, विद्यालय और शिक्षा विभाग—तीनों के अधिकारों और जिम्मेदारियों का सम्मान करते हुए ही किसी विवाद का समाधान निकाला जाना चाहिए। यदि विद्यालयों के खिलाफ एकतरफा दबाव की स्थिति बनी रहती है, तो इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से विद्यालय प्रबंधकों के हित में अपनी आवाज मजबूती से उठाएगा।




