गुरु पूर्णिमा पर दी पैरामाउंट एकेडमी में गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम दृश्य
विद्यार्थियों ने प्रबंधक विजय बहादुर सिंह के चरण पखार कर लिया आशीर्वाद, पोस्टर प्रतियोगिता में दिखी रचनात्मक प्रतिभा

महराजगंज।(न्यूज पैच)। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर दी पैरामाउंट एकेडमी में श्रद्धा, सम्मान और भारतीय संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिला। विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हुए विद्यालय के प्रबंधक विजय बहादुर सिंह का पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार के बीच चरण पखारकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्हें पुष्पमाला पहनाकर एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस भावपूर्ण अवसर पर पूरा विद्यालय परिसर “गुरु देवो भव:” के उद्घोष से गूंज उठा। विद्यार्थियों की श्रद्धा और संस्कारों को देखकर उपस्थित शिक्षक एवं अभिभावक भावुक हो उठे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा कि “गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी दिखाता है। आज के आधुनिक युग में भी हमारे बच्चों में अपनी संस्कृति और संस्कारों के प्रति यह सम्मान देखकर मन अत्यंत प्रसन्न है।” उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु होने की कामना की।
सम्मान समारोह के बाद विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “गुरु का जीवन में स्थान” विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में प्राथमिक से लेकर उच्च कक्षाओं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बच्चों ने अपनी तूलिका और रंगों के माध्यम से गुरु-शिष्य के पवित्र संबंध, द्रोणाचार्य-अर्जुन की परंपरा तथा आधुनिक शिक्षा में शिक्षक की भूमिका को आकर्षक चित्रों के जरिए जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रधानाचार्य द्वारा प्रशस्ति-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से अपने माता-पिता और गुरुओं का सदैव सम्मान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु का मार्गदर्शन ही व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण और उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।
गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के प्रति आस्था को मजबूत करने वाला रहा, बल्कि उनकी रचनात्मक प्रतिभा को भी एक नया मंच प्रदान कर गया।




