9 जून को दिखेगी अद्भुत खगोलीय घटना, आकाश में बेहद करीब नजर आएंगे शुक्र और बृहस्पति ग्रह

महराजगंज।(न्यूज पैच)। को आकाश में एक दुर्लभ और आकर्षक खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। इस दिन बृहस्पति ग्रह और शुक्र ग्रह पश्चिमी आकाश में एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई देंगे। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस खगोलीय घटना को खगोल विज्ञान की भाषा में “संयोजन” या “कंजंक्शन” कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी से देखने पर दो ग्रह आकाश में एक-दूसरे के अत्यंत निकट दिखाई देते हैं तो उसे युति या कंजंक्शन कहा जाता है। हालांकि वास्तविकता में दोनों ग्रह अंतरिक्ष में करोड़ों किलोमीटर की दूरी पर स्थित होते हैं, लेकिन पृथ्वी से देखने पर वे पास-पास दिखाई देते हैं।
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार 9 जून की शाम को शुक्र ग्रह का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 3.89 तथा बृहस्पति ग्रह का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 1.70 रहेगा। दोनों ग्रह मिथुन तारामंडल में स्थित दिखाई देंगे। उन्होंने बताया कि यह प्रभाव इसलिए उत्पन्न होता है क्योंकि ग्रह सूर्य की परिक्रमा क्रांतिवृत्त नामक समान पथ के आसपास करते हैं, जिसके कारण पृथ्वी से देखने पर वे कभी-कभी आकाश के एक ही क्षेत्र में दिखाई देने लगते हैं।
उन्होंने बताया कि शुक्र ग्रह रात्रि आकाश में दिखाई देने वाला सबसे चमकीला ग्रह है, जबकि बृहस्पति दूसरा सबसे चमकीला ग्रह माना जाता है। अनुकूल मौसम की स्थिति में दोनों ग्रहों को नंगी आंखों से आसानी से देखा जा सकता है। इसके लिए किसी विशेष खगोलीय उपकरण की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि दूरबीन, टेलीस्कोप या विनोकुलर की सहायता से ग्रहों और बृहस्पति के चंद्रमाओं को अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।
खगोलविद ने बताया कि दोनों ग्रह सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी दिशा में चमकते हुए दिखाई देने लगेंगे। पर्यवेक्षकों को पूर्ण अंधकार होने की प्रतीक्षा करने की जरूरत नहीं होगी। दोनों ग्रहों के बीच की कोणीय दूरी लगभग 1.6 डिग्री रहेगी, यानी हाथ की लंबाई पर रखी छोटी उंगली की चौड़ाई से भी थोड़ी अधिक दूरी पर दोनों ग्रह दिखाई देंगे।
उन्होंने कहा कि वैसे तो 4 जून से 15 जून 2026 तक दोनों ग्रह पश्चिमी आकाश में एक-दूसरे के आसपास दिखाई दे रहे हैं, लेकिन 9 जून को वे सबसे अधिक करीब नजर आएंगे। इसके बाद धीरे-धीरे दोनों ग्रहों के बीच की दूरी बढ़ने लगेगी।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने लोगों से इस दुर्लभ खगोलीय दृश्य का आनंद लेने की अपील करते हुए कहा कि शाम से लेकर रात लगभग 9 बजे तक पश्चिमी क्षितिज की ओर देखकर इस अद्भुत नजारे को आसानी से देखा जा सकता है।




