राष्ट्रीय लोक अदालत में 58,290 वादों का निस्तारण, 17.88 करोड़ रुपये की समझौता राशि व अर्थदंड
महराजगंज में दीवानी न्यायालय, तहसील न्यायालयों, कलेक्ट्रेट व बाह्य न्यायालय फरेन्दा में हुआ आयोजन; बैंक मामलों में ऋणधारकों को मिली बड़ी राहत

महराजगंज।(न्यूज पैच)। माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर शनिवार को जनपद न्यायाधीश अरविन्द मलिक की अध्यक्षता में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। दीवानी न्यायालय महराजगंज, बाह्य न्यायालय फरेन्दा, कलेक्ट्रेट तथा समस्त तहसील न्यायालय परिसरों में आयोजित लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश ने सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 58,290 वादों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 17,88,89,176 रुपये की समझौता राशि वसूल/अर्थदंड लगाया गया। जनपद न्यायाधीश द्वारा 94 वादों का निस्तारण किया गया।
मोटर दुर्घटना प्रतिकर न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी द्वारा 135 वादों का निस्तारण करते हुए पीड़ितों को 7,71,54,800 रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाई गई। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय द्वारा 57 वैवाहिक वादों का निस्तारण किया गया। स्थायी लोक अदालत ने चार वादों का निस्तारण करते हुए 22,00,425 रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाई।
न्यायालयों में भी बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 466 वाद, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 316 वाद, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय प्रथम द्वारा 183 वाद, अपर सिविल जज कोर्ट संख्या-1 द्वारा 243 वाद तथा अपर सिविल जज जू.डि. कोर्ट संख्या-3 द्वारा 182 वादों का निस्तारण किया गया। इसके अलावा फरेन्दा, नौतनवा और निचलौल स्थित न्यायालयों में भी सैकड़ों मामलों का निस्तारण हुआ।
राजस्व एवं चकबंदी न्यायालयों का रहा बड़ा योगदान
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान समस्त राजस्व एवं चकबंदी न्यायालयों द्वारा 53,874 लंबित एवं प्री-लिटिगेशन वादों का निस्तारण किया गया। इससे बड़ी संख्या में लोगों को न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली।
बैंक ऋण मामलों में भी मिली राहत
सभी बैंकों द्वारा ऋण वसूली से संबंधित 892 प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण किया गया। इनमें भारतीय स्टेट बैंक के 192, यूपी ग्रामीण बैंक के 501, पंजाब नेशनल बैंक के 43, इंडियन बैंक के 24, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के 43, बैंक ऑफ बड़ौदा के 11, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के 32, केनरा बैंक के छह, आरबीएल बैंक के दो, श्रीराम फाइनेंस के 12, सोनाटा फाइनेंस के सात, दूरसंचार विभाग के 16 तथा नम्रा फाइनेंस के तीन मामले शामिल रहे।
बैंकों द्वारा 2,85,62,844 रुपये नकद वसूल किए गए, जबकि 8,95,05,187 रुपये के ऋण का सेटलमेंट किया गया। इसके साथ ही बैंकों ने ऋणधारकों को कुल 11,95,51,265 रुपये की छूट प्रदान की, जिससे ऋणधारकों को बड़ी आर्थिक राहत मिली।
इस अवसर पर न्यायिक अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी, अधिकार मित्र, विभिन्न बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव/सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सुनील कुमार नागर सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका रही।




