सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में दिखेगा शुक्र, स्पाइका और रेगुलस का अद्भुत खगोलीय दृश्य

महराजगंज।(न्यूज पैच)। आकाश प्रेमियों के लिए 4 अगस्त 2026 की शाम एक विशेष खगोलीय नजारा लेकर आ रही है। सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में शुक्र ग्रह, स्पाइका (चित्रा तारा) और रेगुलस (मघा तारा) एक आकर्षक दृश्य संयोजन (Celestial Conjunction) में दिखाई देंगे। इस दुर्लभ दृश्य का अवलोकन बिना किसी विशेष उपकरण के भी किया जा सकेगा।
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान शुक्र ग्रह कन्या तारामंडल के सबसे चमकीले तारे स्पाइका और सिंह तारामंडल के सबसे चमकीले तारे रेगुलस के बीच स्थित दिखाई देगा। यद्यपि ये तीनों खगोलीय पिंड वास्तविक अंतरिक्ष में एक-दूसरे से करोड़ों किलोमीटर दूर हैं, लेकिन पृथ्वी से देखने पर एक ही दिशा में होने के कारण यह सुंदर दृश्य संयोजन बनता है।
उन्होंने बताया कि स्पाइका (अल्फा वर्जिनिस) पृथ्वी से लगभग 250 प्रकाश वर्ष दूर स्थित कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है और यह रात्रि आकाश का 15वां सबसे चमकीला तारा माना जाता है। वहीं रेगुलस (अल्फा लियोनिस) सिंह तारामंडल का प्रमुख तारा है, जिसे “सिंह का हृदय” भी कहा जाता है। यह पृथ्वी से लगभग 79 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है तथा आकाश के सबसे चमकीले तारों में शामिल है।
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार शुक्र ग्रह का मैग्नीट्यूड लगभग –4.14, स्पाइका का +0.97 तथा रेगुलस का +1.40 रहेगा। इसी कारण शुक्र ग्रह दोनों तारों की तुलना में कहीं अधिक चमकीला दिखाई देगा और पश्चिमी आकाश में सबसे पहले ध्यान आकर्षित करेगा।
उन्होंने बताया कि यह दृश्य सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिम दिशा में दिखाई देना शुरू होगा। रेगुलस लगभग शाम 7:30 बजे, शुक्र ग्रह लगभग रात 8:45 बजे तथा स्पाइका लगभग रात 10:00 बजे पश्चिमी क्षितिज के नीचे अस्त हो जाएंगे। इसलिए इस खगोलीय घटना का सबसे अच्छा अवलोकन सूर्यास्त के बाद शुरुआती शाम में किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि मौसम साफ हो तो शहर की कृत्रिम रोशनी से दूर किसी खुले स्थान से पश्चिमी क्षितिज की ओर देखने पर यह दृश्य अधिक स्पष्ट दिखाई देगा। दूरबीन या बाइनोकुलर की सहायता से शुक्र ग्रह और दोनों तारों का दृश्य और भी आकर्षक नजर आएगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऐसे खगोलीय दृश्य विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आम लोगों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ ग्रहों और तारों की आकाशीय स्थिति को समझने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि मौसम अनुकूल रहे तो इस सुंदर खगोलीय दृश्य का अवश्य अवलोकन करें और बच्चों को भी इसके वैज्ञानिक महत्व से परिचित कराएं।




