महराजगंज से शुरू हुई ‘भारत विज्ञान यात्रा’, विद्यार्थियों ने प्रयोगों और अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से जाना
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर हुआ शुभारंभ, खगोलीय दूरबीन से आकाश दर्शन के साथ वीआर, 3डी प्रिंटर और रॉकेट मॉडल ने बढ़ाई बच्चों की जिज्ञासा

महराजगंज।(न्यूज पैच)। विज्ञान को किताबों और प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर आमजन और विद्यार्थियों तक सरल एवं रोचक तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से ‘भारत विज्ञान यात्रा’ का शुभारंभ महराजगंज से हुआ। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर आयोजित यात्रा के पहले एपिसोड में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक प्रयोगों, अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने का प्रयास किया गया।
भारत विज्ञान यात्रा की शुरुआत संस्थापक एस.टी. अली और सह-संस्थापक दिशांक श्रीवास्तव के नेतृत्व में हुई। आयोजकों के अनुसार यात्रा का उद्देश्य विज्ञान एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना तथा युवाओं में जिज्ञासा, प्रयोगशीलता और नवाचार की भावना को बढ़ावा देना है।
दूरबीन से कराया आकाश दर्शन, रॉकेट मॉडल ने बढ़ाई जिज्ञासा
कार्यक्रम में गोरखपुर स्थित नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और खगोलीय घटनाओं के बारे में जानकारी दी। वहीं हरियाणा से आए विज्ञान संचारक एवं लैब सॉल्यूशन्स के निदेशक संजीव कुमार ने विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों के जरिए बच्चों को विज्ञान के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया।
डे एंड नाइट स्पेस फाउंडेशन की टीम ने कार्यक्रम में विशेष सहयोग किया। प्रतिभागियों को खगोलीय दूरबीनों और सोलर गॉगल्स के माध्यम से आकाश दर्शन कराया गया। इसके अलावा वीआर तकनीक, 3डी प्रिंटर, रॉकेट मॉडल और हाइड्रा रॉकेट जैसी गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां समझने का अवसर मिला।
संजीव कुमार ने प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान के पीछे छिपे सिद्धांतों को समझाया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देकर समाज को अंधविश्वास से दूर किया जा सकता है। विज्ञान को रोचक तरीके से समझने पर कठिन अवधारणाएं भी आसानी से समझ में आती हैं।
‘विज्ञान को दैनिक जीवन से जोड़ना जरूरी’
भारत विज्ञान यात्रा के संस्थापक एस.टी. अली ने कहा कि विज्ञान को केवल पाठ्यक्रम का विषय बनाकर सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसे विद्यार्थियों और आम लोगों के दैनिक जीवन से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यात्रा का उद्देश्य वैज्ञानिक सोच को मजबूत करने के साथ नई प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है।
सह-संस्थापक दिशांक श्रीवास्तव ने कहा कि ‘विज्ञान सभी के लिए’ के विचार को आगे बढ़ाना भारत विज्ञान यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है। विज्ञान को सरल और रोचक तरीके से समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए यात्रा के आगामी चरणों में देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मुख्य वक्ता अमर पाल सिंह ने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान जिज्ञासा को नई दिशा देता है और विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
उत्कृष्ट प्रतिभागियों को मिले पुरस्कार
कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवा विज्ञान प्रेमियों को प्रशस्ति पत्र, मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्रथम, द्वितीय, तृतीय और सांत्वना पुरस्कारों के तहत भारत विज्ञान रत्न का सम्मान मनीष पटेल, भारत विज्ञान गौरव का सम्मान मोहम्मद कयूम तथा भारत विज्ञान प्रतिभा का सम्मान युवराज को प्रदान किया गया। अन्य प्रतिभागियों को भी सांत्वना पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।
आयोजकों ने प्रतिभागियों की एकाग्रता, सजगता और विज्ञान के प्रति रुचि की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
आयोजन को मिला सराहनीय सहयोग
कार्यक्रम में आरपीआईसी के चेयरमैन डॉ. पंकज तिवारी, ग्रीन माउंट एकेडमी के संस्थापक जियावुल्लाह, कलावती देवी इंटर कॉलेज के अखिलेश मिश्रा, शीतल पटेल, ज्योति विश्वकर्मा, डे एंड नाइट फाउंडेशन के एडवाइजर मुस्तान शेरुल्लाह, अमरेश कुमार सहित भारत विज्ञान यात्रा की टीम से जुड़े सदस्य और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का लगातार आयोजन और विस्तार जरूरी है।
महराजगंज से शुरू हुई भारत विज्ञान यात्रा अब विज्ञान, वैज्ञानिक सोच और नवाचार का संदेश लेकर देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचने की तैयारी में है। आयोजकों का लक्ष्य विज्ञान को किताबों और प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे आम लोगों के अनुभव और दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना है।




