सहकारिता आंदोलन की सफलता में सचिवों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण: जिलाधिकारी, जैविक खेती और नैनो उर्वरकों को बढ़ावा देने पर जोर

महराजगंज।(न्यूज पैच)। सहकारिता विभाग की योजनाओं को गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और किसानों को आधुनिक एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद स्तरीय सहकारी कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली, “सहकार से समृद्धि” अभियान की प्रगति तथा किसानों के हित में संचालित योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। कार्यशाला में जनपद की सभी सहकारी समितियों के सचिव, विभागीय अधिकारी एवं इफको के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि सहकारी समितियों के सचिव ही सहकारिता आंदोलन की वास्तविक ताकत हैं। किसान और सहकारिता विभाग के बीच सचिव सबसे महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करते हैं। यदि सहकारिता आंदोलन को सफल बनाना है और किसानों तक योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाना है तो सचिवों को पूरी निष्ठा, सक्रियता और जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा।
उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों की भूमिका केवल उर्वरक वितरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और नई कृषि पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और कृषि अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनेगी।
जिलाधिकारी ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के साथ जैविक विकल्पों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रत्येक सहकारी समिति क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रदर्शन प्लॉट विकसित कराने के निर्देश दिए, ताकि किसान स्वयं इन तकनीकों के परिणाम देखकर उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें। उन्होंने कहा कि जैविक उर्वरकों के नियमित उपयोग से भूमि की उर्वरता बढ़ती है, उत्पादन लागत घटती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
बैठक में इफको के नैनो उर्वरकों के प्रचार-प्रसार पर भी विशेष चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि किसानों को नैनो उर्वरकों के लाभों की जानकारी देकर उनके अधिकाधिक उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री सहकारी समितियों के माध्यम से सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे महिला स्वयं सहायता समूहों की आय में वृद्धि होगी और किसानों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद उपलब्ध हो सकेगी।
जिलाधिकारी ने सहकारी समितियों की आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर भी बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन समितियों की भूमि अभी तक राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं है, उनका विशेष अभियान चलाकर अभिलेखीकरण कराया जाए। साथ ही जिन समितियों तक पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग नहीं हैं या सड़कें जर्जर हैं, उनके निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण के प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र संबंधित विभाग को भेजे जाएं, ताकि आवश्यक वित्तीय स्वीकृति प्राप्त कर कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जा सके।
कार्यशाला में सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता) सुनील गुप्ता ने “सहकार से समृद्धि” अभियान की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार में सहकारिता मंत्रालय के गठन के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 29 जून से 5 जुलाई तक जनपद में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत सहकारिता शपथ, प्राकृतिक एवं जैविक खेती विषयक गोष्ठियां, महिला कृषक सदस्यता अभियान, जनजागरूकता कार्यक्रम तथा किसानों की सहभागिता बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
कार्यशाला में इफको के प्रबंधक विनोद मौर्या, सभी एडीसीओ, एडीओ तथा जनपद की सहकारी समितियों के सचिव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।




