केएमसी मेडिकल कॉलेज के नाक-कान-गला विभाग में एंडोस्कोपिक डीसीआर का सफल शल्यक्रिया
डॉ. नंदिनी सेठी ने आधुनिक दूरबीन विधि से पूरी की प्रक्रिया, आंसू की अवरुद्ध नली के उपचार में महत्वपूर्ण है तकनीक

महराजगंज।(न्यूज पैच)। जनपद के केएमसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के नाक, कान एवं गला रोग विभाग ने आधुनिक शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभाग की डॉ. नंदिनी सेठी एवं उनकी चिकित्सकीय टीम द्वारा एंडोस्कोपिक डीसीआर अर्थात डैक्रियोसिस्टोराइनोस्टॉमी शल्यक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की गई। अत्याधुनिक दूरबीन, कैमरा प्रणाली तथा सूक्ष्म शल्य उपकरणों की सहायता से पूरी की गई इस प्रक्रिया के बाद विभाग की टीम ने इसे संस्थान में उपलब्ध उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
एंडोस्कोपिक डीसीआर मुख्य रूप से ऐसे मरीजों के उपचार में की जाने वाली शल्यक्रिया है, जिनकी आंख से आंसुओं को नाक तक पहुंचाने वाली नली में रुकावट उत्पन्न हो जाती है। सामान्य स्थिति में आंख में बनने वाले आंसू आंख के भीतरी कोने में स्थित सूक्ष्म छिद्रों से होकर आंसू की थैली तक पहुंचते हैं और वहां से एक नली के माध्यम से नाक के भीतर चले जाते हैं। इस मार्ग में किसी कारण से अवरोध होने पर आंसुओं का सामान्य निकास प्रभावित हो जाता है।
ऐसी स्थिति में मरीज को आंख से लगातार पानी बहने, बार-बार आंख में संक्रमण होने, चिपचिपा स्राव आने, आंख के भीतरी कोने के पास सूजन, दर्द अथवा आंसू की थैली में संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक रुकावट बने रहने पर मरीज को दैनिक जीवन में काफी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। चिकित्सकीय जांच में नली के अवरुद्ध होने की पुष्टि होने और अन्य उपचार पर्याप्त प्रभावी न होने की स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक डीसीआर शल्यक्रिया की सलाह दे सकते हैं।
इस शल्यक्रिया की विशेषता यह है कि नाक के रास्ते दूरबीन डालकर आंसू की थैली और नाक के बीच एक नया निकास मार्ग बनाया जाता है। इससे आंसुओं को नाक तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ता मिल जाता है। आधुनिक एंडोस्कोपिक पद्धति में चिकित्सक एक उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे की सहायता से नाक के भीतर की सूक्ष्म संरचनाओं को बड़े पर्दे पर स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। इससे प्रभावित हिस्से की पहचान और शल्यक्रिया को नियंत्रित ढंग से पूरा करने में सहायता मिलती है।
केएमसी में संपन्न शल्यक्रिया के दौरान भी आधुनिक एंडोस्कोपिक प्रणाली का उपयोग किया गया। ऑपरेशन कक्ष में डॉ. नंदिनी सेठी एवं उनकी टीम ने कैमरे से प्राप्त चित्रों को सामने लगे मॉनिटर पर देखते हुए संबंधित क्षेत्र तक पहुंच बनाई और आवश्यक शल्य प्रक्रिया पूरी की। उपलब्ध तस्वीरों में भी चिकित्सकीय टीम को अत्याधुनिक उपकरणों तथा मॉनिटर आधारित एंडोस्कोपिक प्रणाली के साथ प्रक्रिया करते देखा जा सकता है।
इस पद्धति का एक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि कई उपयुक्त मरीजों में चेहरे की त्वचा पर बाहरी चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। नाक के प्राकृतिक मार्ग से संबंधित हिस्से तक पहुंचने के कारण बाहरी निशान से बचने की संभावना रहती है। साथ ही चिकित्सक नाक के अंदर की संरचनाओं को सीधे देखकर उपचार कर सकते हैं। हालांकि किस मरीज के लिए कौन-सी विधि उपयुक्त होगी, इसका निर्णय उसकी बीमारी की प्रकृति, जांच, उम्र, अन्य स्वास्थ्य स्थितियों और विशेषज्ञ चिकित्सक के मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।
डीसीआर शल्यक्रिया में नेत्र रोग और नाक-कान-गला चिकित्सा विज्ञान का विशेष संबंध भी दिखाई देता है। आंसू बनने की प्रक्रिया आंख से जुड़ी है, जबकि उनका अंतिम निकास नाक के भीतर होता है। इसी कारण इस क्षेत्र की समस्याओं के उपचार में कई बार दोनों चिकित्सा विधाओं के ज्ञान और समन्वय की आवश्यकता होती है। एंडोस्कोपिक तकनीक ने इस तरह की शल्यक्रियाओं में नाक के भीतर से प्रभावित हिस्से तक पहुंच को अधिक व्यवस्थित बनाया है।
शल्यक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होने पर केएमसी के नाक, कान एवं गला रोग विभाग ने डॉ. नंदिनी सेठी तथा ऑपरेशन से जुड़े चिकित्सकों, तकनीकी कर्मचारियों, नर्सिंग एवं सहायक कर्मियों को बधाई दी। विभाग ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए चिकित्सा टीम के समन्वय और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग की सराहना की।
संस्थान में इस प्रकार की आधुनिक एंडोस्कोपिक शल्यक्रियाओं का सफलतापूर्वक किया जाना मरीजों को उन्नत उपचार सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




