सिसवा बाजार में अमृत सरोवर परियोजना में अनियमितताओं पर कड़ा एक्शन, तीन कर्मचारियों के निलंबन की संस्तुति

महराजगंज।(न्यूज पैच)। नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार के मीरा बाई नगर वार्ड संख्या-25 में करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन अमृत सरोवर परियोजना में कथित भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
18 जुलाई 2026 को प्राप्त शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए त्रि-सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति में उप जिलाधिकारी निचलौल, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग महराजगंज और उपायुक्त श्रम रोजगार महराजगंज को शामिल किया गया था। समिति को परियोजना में लगाए गए भ्रष्टाचार, निर्माण गुणवत्ता और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की स्थलीय एवं अभिलेखीय जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे।
तीन बच्चों की मौत का मामला भी जांच में शामिल
जांच के दौरान सरोवर में तीन बच्चों की डूबने से हुई मौत की घटना को भी गंभीरता से लिया गया। समिति को यह जांचने के निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य और उसके पर्यवेक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने दायित्वों का उचित निर्वहन किया था या नहीं।
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर वर्तमान अधिशासी अधिकारी विन्ध्याचल को स्पष्टीकरण जारी किया जा चुका है। वहीं अमृत-2.0 के तहत तालाब सौंदर्यीकरण के वास्तविक निर्माण कार्य के दौरान तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका और पर्यवेक्षणीय दायित्वों की भी जांच की गई।
तीन कर्मचारियों के निलंबन की संस्तुति
जांच आख्या के आधार पर तत्कालीन अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज, अवर अभियंता देवेंद्र कुमार और लिपिक विनोद कुमार के निलंबन की संस्तुति की गई है। वहीं तत्कालीन अधिशासी अधिकारी प्रियंका मिश्रा का स्पष्टीकरण प्राप्त किए जाने की संस्तुति की गई है।
इस संबंध में जिलाधिकारी द्वारा प्रमुख सचिव, नगर विकास को पत्र भेजकर नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की संस्तुति की गई है। प्रशासन के अनुसार, तीन बच्चों की मौत की घटना के तत्काल बाद संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उसे जेल भेजने की कार्रवाई भी की गई थी।
विकास कार्यों में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस
जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने स्पष्ट कहा कि सरकारी धन से संचालित विकास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, घटिया निर्माण अथवा पर्यवेक्षण में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा। किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन में भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति प्रभावी है और किसी को भी संरक्षण नहीं दिया जाएगा।




