सिसवा नगरपालिका की जीत, जमींदार परिवार को कोर्ट से झटका
विवाह भवन-दुकानों के निर्माण पर रोक की मांग खारिज

सिसवा, महराजगंज।(न्यूज पैच)। नगर पालिका परिषद और जमींदार परिवार के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में नगरपालिका को बड़ी कानूनी जीत मिली है। सार्वजनिक हित में कराए जा रहे विवाह भवन और दुकानों के निर्माण कार्य को रुकवाने के लिए दायर निषेधाज्ञा वाद में न्यायालय ने निर्माण पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया। इससे नगरपालिका की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्य का रास्ता साफ हो गया है।
मामला सिविल जज प्रवर खंड/एफटीसी न्यायालय में विचाराधीन निषेधाज्ञा वाद संख्या 174/2022, शिवेंद्र सिंह आदि बनाम नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार से जुड़ा है। शिवेंद्र सिंह पुत्र रामप्रसाद सिंह, मानवेंद्र सिंह पुत्र यादवेंद्र सिंह और राघवेंद्र सिंह पुत्र देवेंद्र सिंह की ओर से नगरपालिका के खिलाफ वाद दाखिल कर विवाह भवन और दुकानों के निर्माण कार्य को रुकवाने के लिए निषेधाज्ञा की मांग की गई थी।
मामले में वादी पक्ष की ओर से न्यायालय में प्रार्थना पत्र 6-सी दाखिल कर निर्माण कार्य पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया। दोनों पक्षों की बहस सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने वादी पक्ष की ओर से दाखिल निषेधाज्ञा प्रार्थना पत्र को निरस्त/खारिज कर दिया।
न्यायालय के इस आदेश को नगरपालिका के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आदेश के बाद सार्वजनिक एवं जनहित में प्रस्तावित विवाह भवन और दुकानों के निर्माण कार्य को लेकर नगरपालिका का पक्ष मजबूत हुआ है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद में नगरपालिका की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्य को लेकर उठाए गए कानूनी सवालों पर भी फिलहाल विराम लगा है।
बताया गया कि नगरपालिका परिषद सिसवा बाजार की ओर से क्षेत्र में सार्वजनिक उपयोग के लिए विवाह भवन और दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। इसी निर्माण को रुकवाने के उद्देश्य से वादी पक्ष न्यायालय पहुंचा था। मामले में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क और साक्ष्य न्यायालय के समक्ष रखे। सुनवाई के बाद अदालत ने वादी पक्ष की ओर से मांगी गई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
न्यायालय द्वारा 6-सी प्रार्थना पत्र खारिज किए जाने के बाद नगरपालिका प्रशासन को बड़ी राहत मिली है। अब निर्माण कार्य को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया अलग से जारी रह सकती है, लेकिन तत्काल निर्माण पर रोक लगाने की मांग अदालत से स्वीकार नहीं हुई है। इससे नगरपालिका के प्रस्तावित सार्वजनिक निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की स्थिति बनी है।
नगरपालिका अध्यक्ष शकुंतला जायसवाल व उनके प्रतिनिधि गिरजेश जायसवाल का कहना है कि निर्माण कार्य जनहित और सार्वजनिक उपयोग को ध्यान में रखते हुए कराया जा रहा है। न्यायालय के आदेश से ऐसे कार्यों को लेकर नगरपालिका का पक्ष मजबूती से सामने आया है। वहीं, विवाद से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं पर अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही स्पष्ट होगी।
इस मामले में न्यायालय के आदेश के बाद सिसवा में नगरपालिका और जमींदार परिवार के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक की मांग खारिज होने से नगरपालिका को बड़ी राहत मिली है।




