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ट्राम वे की पीर और रेलवे का जश्न

वेदना और उपलब्धि के सफर से गुजर रहा महराजगंज

महराजगंज।(न्यूज पैच)। नया वर्ष आजादी के 78साल बाद जनपद मुख्यालय को रेलवे से जोड सूरज के चमकते किरणो सा सवेरा लेकर आया तो 1924 मे बने ट्राम वे से बिरान जंगल चांद की खूबसूरती मे दाग सा कसक भी दे दिया।जनपदवासी रेलवे को लेकर ऐसे दोराहे पर खडे है। कि समझ ही आ रहा है। कि जनपद मुख्यालय का नाम रेलवे के नक्शे से जुडने की खुशी मनाए या 102साल पूर्व अंग्रेजो के जमाने से जुडे ट्राम वे की पहचान मिटने का गम बया करे।

जनपद रेलवे के सफर के उहापोह से गुजर रहा है। जहा मुख्यालय को रेलवे से जोडने के लिए घुघली से आंनदनगर 52किमी नई रेलवे लाइन बिछाने का कार्य प्रगति पर है। और दूसरी तरफ सोहगीबरवा के लक्ष्मीपुर मे चलने वाले 16किमी रेलवे लाइन के ट्राम वे इंजन की स्मृति भी जनपद से रुख्सत हो गयी। जनपद के मुख्यालय का रेलवे लाइन से न जुडना राजनैतिक गलियारे का मुद्दा बना और केद्र मे भाजपा की सरकार होने के कारण बेजीपी सासंद व केद्रीय मंत्री पंकज चौधरी पर रेलवे का दारोमदार आ गया।

भाजपा के स्थानीय सासंद की मांग पर जिला मुख्यालय को रेलवे की सौगात मिली और रेलवे परियोजना को958.27करोड का बजट मिला। घुघली से आनंदनगर तक 52. 7किमी रेलवे लाइन परियोजना का कार्य प्रगति पर है, रेलवे भूमि मुआवजे कावितरण अंतिम चरण मे है।रेलवे परियोजना मे32अंडरपास 26पुल और 7स्टेशन प्रस्तावित है। रेलवे लाइन पर जगह जगह पुल और अंडरपास के कार्य शुरु हो गये है। वर्ष2027तक रेलवे परियोजना पूर्ण होना है, रेलवे का कार्य चरम पर है इस योजना की उपलब्धि से जनपद हर्षित था तभी रेलवे से जुडी ट्राम वे की पीर से जनपद आहत हो गया। जनपद मे ट्राम वे के रुप मे स्थापित पहली रेल योजना का अस्तित्व भी मिटने लगा।

आजादी के 78साल बाद जहा जनपद मुख्यालय को रेलवे मिला वही दूसरी तरफ1924मे स्थापित ट्राम वे रेल102साल बाद अपनी खट्टी मिट्ठी यादो को लेकर इस जनपद से विदा हो गयी।जनपद के सोहगीबरवा वन्यक्षेत्र के लक्ष्मीपुर डिपो मे वर्ष1924मे एकमा से टेढी घाट तक16किमी रेलवे लाइन बिछाई गयी। जनपद की यह पहली ट्रेन भाप के इंजन से चलती थी और लकडी ढोने का कार्य इससे होता रहा।1924से1982तक इस ट्रेन का संचालन होता रहा। यह ट्रेन इतिहास के पन्ने मे दर्ज है और जनपद मे रेलवे योजना के ऐतिहासिक लम्हो को पीढियो तक पहुचाता रहेगा।

ट्राम वे का भाप वाला इजंन 21सदी के युवा के लिए कौतूहल रहा और इसे देखने और ज्ञान अर्जन के लिए नौजवान पहुचते थे। 1982मे इस ट्रेन का संचालन बंद होने के बाद रेलवे लाइन बाढ मे मिट्ठी और खरपतवार से ढक गये। ट्राम वे रेलवे का इंजन44वर्षो तक जनपद मे विद्यमान रहा। इस ट्रेन के इंजन को स्टार्ट करने के क ई प्रयास हुए लेकिन सफलता नही मिली। 44साल तक बंद पडे इस इंजन को लखनऊ शिफ्ट करने का फरमान आया तो जनपदवासी मायूस हो उठे।

जनपदवासी ट्राम वे को ऐतिहासिक धरोहर के रुप से संजोने की मांग करने लगे,आमजन इस प्राचीन धरोहर को जनपद के आने वाली पीढियो के लिए सुरक्षित रखने की इच्छा जताए लेकिन उन्हे निराशा मिली। नये साल2026मे रेलवे को लेकर दो वाक्या जन जन के जुबान पर छा गया। वयोवद्ध अपने जीवन के अंतिम पडाव पर मुख्यालय तक रेलवे के जुडने का पल और नौनिहाल अपने प्राचीन और ऐतिहासिक ट्राम वे रेलवे के दीदार से महरुम होने की पीर इस साल मे देखने को मिल रही है।

सुनील कुमार श्रीवास्तव 

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