ब्रेकिंग न्यूजमहराजगंजयूपीलोकल न्यूज़

बसंतपुर में 20 अक्टूबर को लगेगा घुघली क्षेत्र का पहला रामलीला मेला, राम-रावण युद्ध का इंतजार

अंग्रेजों के शासनकाल से चली आ रही परंपरा आज भी कायम, श्रीवास्तव परिवार निभा रहा विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी बरकत अली के हारमोनियम वादन और बृजनारायण श्रीवास्तव के अभिनय की यादें आज भी जीवंत, हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है बसंतपुर की रामलीला

महराजगंज।(न्यूज पैच)। घुघली विकासखंड के ग्रामसभा बसंतपुर में 20 अक्टूबर को आयोजित होने वाले रामलीला मेले को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस मेले में राम-रावण युद्ध के मंचन और रावण दहन का लोगों को बेसब्री से इंतजार है। आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। बसंतपुर की रामलीला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे की पहचान भी रही है।

श्रीवास्तव परिवार के यहां जुटते हैं कलाकार

बसंतपुर की रामलीला की खास परंपरा है कि मंचन में भाग लेने वाले कलाकार श्रीवास्तव परिवार के यहां एकत्र होते हैं। यहां वे अपने-अपने पात्रों के अनुरूप वेशभूषा धारण करते हैं और राम, लक्ष्मण, रावण सहित अन्य चरित्रों का रूप लेकर भ्रमण करते हुए रामलीला मैदान पहुंचते हैं। इसके बाद राम और रावण के बीच युद्ध का मंचन होता है। रावण वध के बाद पुतला दहन कर असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया जाता है।

अंग्रेजों के शासनकाल में रखी गई थी नींव

स्थानीय लोगों के अनुसार, बसंतपुर की रामलीला की शुरुआत अंग्रेजों के शासनकाल में अंग्रेजों द्वारा नामित मुखिया स्वर्गीय तुलसी लाल श्रीवास्तव ने की थी। उनके बाद उनके पुत्र स्वर्गीय बृजकिशोर लाल श्रीवास्तव, तत्कालीन मुखिया स्वर्गीय बृजनारायण श्रीवास्तव, स्वर्गीय बरकत अली और अन्य लोगों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। ग्राम प्रधान स्वर्गीय रूप नारायण सिंह के नेतृत्व में भी आयोजन को आगे बढ़ाया गया।

समय के साथ कई पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन गांव के लोगों की आस्था और परंपरा को जीवित रखने का प्रयास जारी रहा। एक समय नवरात्र शुरू होते ही रामलीला की तैयारियां तेज हो जाती थीं। कलाकार कई सप्ताह पहले से संवाद, अभिनय, चौपाइयों के गायन और वेशभूषा की तैयारी में जुट जाते थे। मंचन देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते थे।

अंगद के अभिनय के लिए याद किए जाते हैं बृजनारायण श्रीवास्तव

बसंतपुर की रामलीला से जुड़ी कई यादें आज भी बुजुर्गों और पुराने कलाकारों के मन में जीवित हैं। स्वर्गीय बृजनारायण श्रीवास्तव अपने अभिनय के लिए विशेष रूप से याद किए जाते हैं। बताया जाता है कि वे रामलीला में विभिन्न भूमिकाएं निभाते थे, लेकिन अंगद के पात्र में उनके अभिनय की विशेष सराहना होती थी।

इसी तरह स्वर्गीय दमड़ी तिवारी, जिन्हें लोग प्यार से ‘रावण बाबा’ कहते थे, रावण की भूमिका निभाते थे। उनका अभिनय और रामलीला में योगदान लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बना रहा। उस दौर में रामलीला केवल धार्मिक मंचन नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक भागीदारी का अवसर होती थी।

बरकत अली के हारमोनियम वादन ने पेश की भाईचारे की मिसाल

बसंतपुर की रामलीला की सबसे विशिष्ट पहचान हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द भी है। गांव के स्वर्गीय बरकत अली रामलीला के दौरान हारमोनियम बजाते थे। वे रामचरितमानस की चौपाइयों का गायन करने के साथ कलाकारों को अभ्यास कराने में भी सहयोग करते थे।

धार्मिक आयोजन में उनका सक्रिय योगदान गांव की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल के रूप में याद किया जाता है। यह परंपरा बताती है कि सामाजिक सद्भाव, सहयोग और एक-दूसरे की आस्थाओं के प्रति सम्मान से ही सांस्कृतिक विरासत मजबूत होती है।

बदलते समय में पुरानी रौनक लौटाने की चुनौती

समय के साथ मनोरंजन के साधन बदले हैं और पारंपरिक लोककलाओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। बसंतपुर की रामलीला भी इससे अछूती नहीं है। पुराने कलाकारों का कहना है कि पहले जहां मंचन देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ती थी, वहीं अब पहले जैसा उत्साह बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

कलाकारों के अनुसार, नियमित अभ्यास, बेहतर मंच, उचित मार्गदर्शन और नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी से रामलीला को और आकर्षक बनाया जा सकता है। स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलने से इस परंपरा को नई पहचान भी मिल सकती है।

युवा पीढ़ी के सहयोग से आगे बढ़ रही विरासत

रामलीला आयोजन समिति के अध्यक्ष सतीश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि गांव की युवा पीढ़ी इस परंपरा को जीवित रखने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने ग्राम प्रधान अनामिका सिंह और उनके पति सिद्धार्थ सिंह के सहयोग की सराहना की। उनके अनुसार, गांव के लोगों और सहयोगियों के सामूहिक प्रयास से ही वर्षों पुरानी इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाया जा रहा है।

कलाकार चंदन पाठक, सुभाष चौधरी, छेदी मौर्य, शिव कुमार जायसवाल और दीपु जायसवाल सहित अन्य कलाकारों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत बेहतर मंच, नियमित अभ्यास और प्रोत्साहन की है। वहीं, जाकिर अली, गोधन अली, सिकंदर अली और प्रदीप सिंह सहित पुराने कलाकार भी चाहते हैं कि रामलीला का मंचन पहले की तरह भव्यता और उत्साह के साथ होता रहे।

मां दुर्गा के दर्शन को पहुंच रहे श्रद्धालु

रामलीला स्थल पर मां दुर्गा की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु यहां पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं। धार्मिक वातावरण और मेले की तैयारियों से गांव में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन पूजा-अर्चना के साथ-साथ मेल-मिलाप और सामाजिक सहभागिता का अवसर भी है।

20 अक्टूबर को होगा राम-रावण युद्ध और रावण दहन

आयोजन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, 20 अक्टूबर को दोपहर बाद कलाकार श्रीवास्तव परिवार के यहां एकत्र होंगे। इसके बाद वे अपने पात्रों की वेशभूषा धारण कर भ्रमण करते हुए रामलीला मैदान पहुंचेंगे। मैदान में राम-रावण युद्ध का मंचन किया जाएगा और रावण वध के बाद पुतला दहन होगा।

बसंतपुर के अलावा बरगदवा माधोपुर, बासपार मिश्र, मटकोपा और बारीगांव सहित अन्य स्थानों पर भी रामलीला के आयोजन होते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बसंतपुर का मेला अपने पुराने इतिहास और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान के कारण विशेष महत्व रखता है।

बसंतपुर की रामलीला आज भी यह संदेश देती है कि परंपराओं को जीवित रखने के लिए समाज की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। स्वर्गीय बृजनारायण श्रीवास्तव का अभिनय, बरकत अली का हारमोनियम वादन और रावण बाबा की यादें इस आयोजन की विरासत का हिस्सा हैं। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें 20 अक्टूबर को होने वाले राम-रावण युद्ध और रावण दहन पर टिकी हैं।

News Patch desk

News Patch का डेस्क अनुभवी और समर्पित पत्रकारों की एक टीम है, जो 24×7 सटीक, तेज और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए कार्यरत है। डेस्क टीम का मुख्य उद्देश्य हर खबर को तथ्यों के साथ परखकर, निष्पक्ष और संतुलित तरीके से प्रस्तुत करना है। डेस्क पर कार्यरत पत्रकारों को विभिन्न बीट्स—जैसे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दे, और ब्रेकिंग न्यूज़—का गहरा अनुभव है। टीम लगातार बदलते न्यूज़ ट्रेंड्स पर नजर रखती है और हर महत्वपूर्ण अपडेट को तुरंत कवर करती है। News Patch Desk की विशेषता उसकी गति और विश्वसनीयता है। टीम आधुनिक डिजिटल टूल्स और मजबूत संपादकीय प्रक्रिया के माध्यम से खबरों की गुणवत्ता बनाए रखती है। हर खबर को प्रकाशित करने से पहले उसकी पुष्टि और सत्यापन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। डेस्क टीम का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि पाठकों को जागरूक और सूचित रखना है, ताकि वे सही जानकारी के आधार पर अपने विचार बना सकें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!