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शाम के आसमान में दिखेगा अद्भुत खगोलीय नजारा, चंद्रमा के पास चमकेगा शुक्र, नीचे नजर आएगा रेगुलस

महराजगंज।(न्यूज पैच)। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए शुक्रवार की शाम पश्चिमी आकाश में एक मनमोहक खगोलीय दृश्य देखने को मिलेगा। सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर चंद्रमा, सौरमंडल का सबसे चमकीला ग्रह शुक्र और सिंह (Leo) तारामंडल का प्रमुख तारा रेगुलस एक ही आकाशीय क्षेत्र में दिखाई देंगे। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के खगोलविद् अमर पाल सिंह के अनुसार यह दृश्य खुले और साफ आकाश में बिना किसी विशेष उपकरण के भी आसानी से देखा जा सकेगा। लगभग रात 9 बजे तक इसका अवलोकन किया जा सकेगा, जिसके बाद ये तीनों खगोलीय पिंड धीरे-धीरे पश्चिमी क्षितिज के नीचे अस्त हो जाएंगे।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस अवसर पर आकाश में चंद्रमा और शुक्र ग्रह का सुंदर संयोजन (Conjunction) दिखाई देगा। हालांकि अंतरिक्ष में दोनों खगोलीय पिंड एक-दूसरे से बहुत दूर होते हैं, लेकिन पृथ्वी से देखने पर वे एक-दूसरे के बेहद करीब प्रतीत होते हैं। इसी दृश्य प्रभाव को खगोल विज्ञान में युति (Conjunction) कहा जाता है। ऐसे खगोलीय संयोजन आम लोगों और खगोल प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का विषय होते हैं।

उन्होंने बताया कि इस सुंदर दृश्य को और भी आकर्षक बनाने वाला सिंह तारामंडल का सबसे चमकीला तारा रेगुलस भी शुक्र और चंद्रमा के नीचे दिखाई देगा। नीले-सफेद रंग का यह अत्यंत गर्म तारा पृथ्वी से लगभग 79 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है और सिंह तारामंडल के “हृदय” (Heart of the Lion) का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्रमा, शुक्र और रेगुलस का एक साथ दिखाई देना पश्चिमी आकाश को बेहद आकर्षक बना देगा।

पतले अर्धचंद्र के रूप में दिखाई देगा चंद्रमा

अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दिन चंद्रमा अपनी वैक्सिंग क्रिसेंट (Waxing Crescent) अवस्था में रहेगा। इस चरण में चंद्रमा का केवल एक पतला, घुमावदार प्रकाशित भाग दिखाई देता है, जबकि शेष हिस्सा अंधकारमय रहता है। उन्होंने बताया कि “वैक्सिंग” का अर्थ है कि चंद्रमा का प्रकाशित भाग प्रतिदिन बढ़ रहा है, जबकि “क्रिसेंट” उसके हंसिया जैसे आकार को दर्शाता है। इस अवस्था में चंद्रमा का पतला प्रकाशित किनारा और उसके निकट चमकता हुआ शुक्र ग्रह अत्यंत मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करेगा।

सबसे चमकीला क्यों दिखता है शुक्र ग्रह?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि शुक्र ग्रह को प्राचीन काल में “संध्या तारा” और “भोर का तारा” कहा जाता था, हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक ग्रह है। शुक्र के घने बादल सूर्य के प्रकाश का लगभग 70 प्रतिशत से अधिक भाग परावर्तित कर देते हैं। यही कारण है कि सूर्य और चंद्रमा के बाद यह आकाश में सबसे चमकीला प्राकृतिक खगोलीय पिंड दिखाई देता है। सूर्यास्त के बाद इसकी तेज चमक इसे आसानी से पहचानने योग्य बना देती है।

तीनों खगोलीय पिंड बनाएंगे आकर्षक दृश्य

उन्होंने बताया कि इस दौरान चंद्रमा का दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग –7.7, शुक्र ग्रह का –4.03 तथा रेगुलस का लगभग +1.40 रहेगा। तीनों एक ही आकाशीय क्षेत्र में दिखाई देंगे, जिससे पश्चिमी आकाश का दृश्य और भी मनमोहक बन जाएगा।

कैसे और कहां देखें यह दुर्लभ नजारा

अमर पाल सिंह के अनुसार इस दृश्य को देखने के लिए किसी विशेष दूरबीन की आवश्यकता नहीं है। यदि पश्चिमी क्षितिज साफ हो और प्रकाश प्रदूषण कम हो तो इसे नग्न आंखों से आसानी से देखा जा सकता है। हालांकि अच्छी गुणवत्ता वाले बाइनॉकुलर या छोटी दूरबीन से देखने पर चंद्रमा की सतह, उसका पतला प्रकाशित भाग तथा शुक्र ग्रह की चमक और भी स्पष्ट दिखाई देगी।

उन्होंने बताया कि शहरों में कृत्रिम रोशनी अधिक होने के कारण आकाशीय पिंडों की दृश्यता प्रभावित हो सकती है। इसलिए खुले मैदान, ग्रामीण क्षेत्र या कम प्रकाश प्रदूषण वाले स्थान से इस घटना का अवलोकन करना अधिक उपयुक्त रहेगा।

बच्चों और परिवार के लिए सीखने का सुनहरा अवसर

खगोलविद अमर पाल सिंह ने कहा कि ऐसे खगोलीय संयोजन लोगों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच विकसित करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल दृष्टि-रेखा (Line of Sight) का प्रभाव होता है, वास्तव में चंद्रमा, शुक्र और रेगुलस अंतरिक्ष में एक-दूसरे के पास नहीं होते।

उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि मौसम साफ रहे तो परिवार और बच्चों के साथ पश्चिमी आकाश का यह दुर्लभ नजारा अवश्य देखें। यह दृश्य न केवल प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का अनुभव कराएगा, बल्कि नई पीढ़ी में विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति रुचि बढ़ाने का भी एक सुनहरा अवसर बनेगा।

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