गोसदन मधवलिया का DM ने किया निरीक्षण
जिलाधिकारी ने अव्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी, मॉडल गोसदन बनाने के दिए निर्देश

महराजगंज। (न्यूज पैच)। जनपद में प्रशासनिक सक्रियता का एक और उदाहरण सामने आया, जब जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी और मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह के साथ गोसदन मधवलिया का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गोसदन में पशु शेड, वर्मी कंपोस्ट इकाई, गोबर गैस प्लांट, हरे चारे की उपलब्धता सहित अन्य व्यवस्थाओं को विस्तार से देखा और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान गोबर गैस प्लांट की मरम्मत लंबे समय से लंबित पाए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने जल निगम के संबंधित अधिकारी को तत्काल मरम्मत कार्य कराने के सख्त निर्देश दिए। इसके अलावा परिसर में मौजूद जर्जर भवन को तत्काल ध्वस्त कराने को कहा, ताकि किसी संभावित हादसे को रोका जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जो शेड अनुपयोगी पड़े हैं, उनकी मरम्मत कर उनमें गोवंश को सुरक्षित रखा जाए और गोसदन की पूरी क्षमता का उपयोग किया जाए।
जिलाधिकारी ने गोसदन में संरक्षित पशुओं की संख्या की जानकारी ली। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ एजाज अहमद ने बताया कि वर्तमान में गोसदन में कुल 739 गोवंश संरक्षित हैं, जिनमें 559 नंदी और 180 गाय शामिल हैं। पशुओं के चारे की उपलब्धता के संबंध में बताया गया कि गोसदन में पर्याप्त मात्रा में भूसा, चोकर, पशु आहार और साइलेज उपलब्ध है। साथ ही गोसदन की भूमि पर बड़े पैमाने पर बाजरा, नेपियर घास और जई की खेती कर हरे चारे की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने एक बीमार गोवंश के उपचार के बारे में भी जानकारी ली और निर्देश दिया कि सभी पशुओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए तथा उनकी उचित देखभाल में कोई लापरवाही न बरती जाए।
जिलाधिकारी ने गोसदन को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने परिसर में फलदार वृक्ष लगाने के निर्देश दिए, ताकि अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित किया जा सके। साथ ही वर्मी कंपोस्ट उत्पादन की जानकारी लेते हुए पाया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इसमें सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि वर्मी कंपोस्ट की बिक्री के लिए उचित मार्केट लिंक उपलब्ध कराया जाए और इसे बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जाए।
इसके अलावा गोबर से तैयार किए जा रहे गोकाष्ठ (लकड़ी) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जिलाधिकारी ने अंत्येष्टि स्थलों और नगर निकायों में इसके उपयोग की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए तो गोसदन मधवलिया को एक मॉडल और आत्मनिर्भर गोसदन के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए जिला विकास अधिकारी को विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर उसे लागू करने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्य विकास अधिकारी ने गोवंश को गुड़, केला और चना खिलाकर उनका हाल-चाल भी जाना, जो संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
गोसदन मधवलिया का यह निरीक्षण प्रशासन की गंभीरता और जवाबदेही को दर्शाता है। जहां एक ओर कमियों पर सख्ती दिखाई गई, वहीं दूसरी ओर गोसदन को आत्मनिर्भर और मॉडल बनाने की स्पष्ट दिशा भी तय की गई। आने वाले समय में इन निर्देशों का जमीन पर कितना प्रभाव पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।
इस अवसर पर डीडीओ बी. एन. कन्नौजिया, परियोजना निदेशक आर. डी. चौधरी, बीडीओ निचलौल शमां सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।




