4 अक्टूबर को शनि ग्रह होगा सूर्य के विपरीत, पूरी रात आकाश में दिखेगा वलयों का सम्राट
शनि की विपक्ष स्थिति के साथ चंद्रमा, मंगल और बृहस्पति भी बिखेरेंगे चमक; 7 अक्टूबर को चंद्रमा और रेगुलस तारे की दिखेगी युति

गोरखपुर/महराजगंज।(न्यूज पैच)। खगोल प्रेमियों के लिए 4 अक्टूबर 2026 की रात बेहद खास होने जा रही है। इस दिन शनि ग्रह अपनी विपक्ष स्थिति (Opposition) में पहुंचेगा। इस खगोलीय घटना के दौरान पृथ्वी सूर्य और शनि के बीच स्थित होगी, जिससे शनि सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में दिखाई देगा। इस अवसर पर शनि अपनी अपेक्षाकृत अधिक चमक और बड़े आकार के कारण पूरी रात आकाश में दर्शनीय रहेगा।
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल), गोरखपुर के खगोलविद एवं एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर अमर पाल सिंह ने बताया कि 4 अक्टूबर को शनि की विपक्ष स्थिति भारतीय समयानुसार शाम 5:30 बजे होगी। सूर्यास्त के बाद से ही इसे पूर्वी आकाश में देखा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यह खगोलीय घटना शनि के वलयों और उसकी सुंदरता को निहारने का विशेष अवसर प्रदान करेगी।
क्या होती है शनि ग्रह की विपक्ष स्थिति?
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, विपक्ष स्थिति वह खगोलीय अवस्था है, जब पृथ्वी सूर्य और किसी बाहरी ग्रह के बीच आ जाती है। इस दौरान ग्रह सूर्य के विपरीत दिशा में दिखाई देता है। सूर्यास्त के समय ग्रह उदय होता है और सूर्योदय के समय अस्त होता है। इस कारण वह पूरी रात आकाश में दिखाई दे सकता है।
शनि की विपक्ष स्थिति लगभग 378 दिनों के अंतराल पर आती है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा एक वर्ष में पूरी करती है, जबकि शनि को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 29.4 पृथ्वी वर्ष लगते हैं। इसी कारण पृथ्वी को प्रत्येक वर्ष शनि से आगे निकलने में थोड़ा अतिरिक्त समय लगता है और शनि की विपक्ष स्थिति हर साल लगभग दो सप्ताह आगे खिसकती जाती है।
चमक, दूरी और आकार
4 अक्टूबर 2026 को शनि की चमक लगभग +0.32 मैग्नीट्यूड रहने का अनुमान है। इस दौरान पृथ्वी से इसकी दूरी लगभग 1.26 अरब किलोमीटर यानी 8.43 खगोलीय इकाई होगी। शनि की डिस्क का कोणीय व्यास लगभग 19.7 आर्कसेकंड दिखाई देगा।
खगोलविद ने बताया कि विपक्ष स्थिति के दौरान शनि पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट होता है, जिससे इसकी चमक और आभासी आकार में वृद्धि होती है। इस समय इसके वलयों का झुकाव भी दूरबीन से देखने वालों के लिए विशेष आकर्षण रहेगा।
मार्च 2025 में शनि के वलय तल से गुजरने के दौरान वलय पृथ्वी से लगभग किनारे की ओर दिखाई दिए थे, जिससे छोटी दूरबीनों से उन्हें देखना कठिन हो गया था। अक्टूबर 2026 में वलय धीरे-धीरे अधिक खुलते हुए दिखाई देंगे। इस समय उनका झुकाव लगभग 7.5 डिग्री दक्षिण की ओर होगा। हालांकि यह 2017 में दिखाई दिए लगभग 27 डिग्री के अधिकतम झुकाव जितना नहीं है, फिर भी छोटी दूरबीनों से वलयों को देखने के लिए अनुकूल स्थिति होगी।
4 से 7 अक्टूबर तक दिखेगा ग्रहों और तारों का सुंदर नजारा
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 4 से 7 अक्टूबर तक रात के आकाश में शनि, चंद्रमा, मंगल, बृहस्पति और कई चमकीले तारों का आकर्षक दृश्य देखने को मिलेगा। इन खगोलीय पिंडों की स्थिति, चमक और उदय होने के समय में प्रतिदिन थोड़ा बदलाव होगा।
4 अक्टूबर की रात का संभावित खगोलीय कार्यक्रम इस प्रकार है—
- शनि ग्रह: शाम लगभग 5:50 बजे के बाद पूर्वी क्षितिज से ऊपर दिखाई देगा। यह सीटस (Cetus) तारामंडल में लगभग +0.32 मैग्नीट्यूड की चमक के साथ पूरी रात देखा जा सकेगा।
- चंद्रमा: रात लगभग 12:30 बजे पूर्वी क्षितिज पर कर्क (Cancer) तारामंडल की दिशा में उदय होगा। इसकी चमक लगभग -9.57 मैग्नीट्यूड होगी। चंद्रमा के ऊपर कैस्टर (Castor) और पोलक्स (Pollux) तारे भी दिखाई देंगे।
- मंगल ग्रह: रात लगभग 12:50 बजे पूर्वी क्षितिज पर उदय होगा। यह कर्क तारामंडल के क्षेत्र में लगभग +1.10 मैग्नीट्यूड की चमक के साथ दिखाई देगा।
- बृहस्पति ग्रह: रात लगभग 2:05 बजे सिंह (Leo) तारामंडल में उदय होगा। इसकी चमक लगभग -1.74 मैग्नीट्यूड होगी।
- रेगुलस तारा: रात लगभग 2:50 बजे सिंह तारामंडल में पूर्वी क्षितिज के ऊपर दिखाई देगा। इसकी चमक लगभग +1.40 मैग्नीट्यूड होगी।
उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर की रात लगभग 2:40 बजे के बाद चंद्रमा और रेगुलस तारे के बीच सुंदर युति (Conjunction) भी देखने को मिलेगी। इस दौरान दोनों खगोलीय पिंड आकाश में एक-दूसरे के काफी पास दिखाई देंगे।
शनि के वलय और चंद्रमाओं की दुनिया
शनि सूर्य से छठा ग्रह है। प्राचीन काल में लोग इसे स्थिर तारों के बीच गति करने वाले सुनहरे तारे के रूप में देखते थे, लेकिन बाद में यह स्पष्ट हुआ कि शनि कोई तारा नहीं, बल्कि एक विशाल ग्रह है।
17वीं शताब्दी में दूरबीनों के विकास के बाद इसके वलयों को देखा जा सका। बाद में अंतरिक्ष अभियानों ने इनके बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई। शनि के वलय बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़ों और अन्य कणों से बने हैं, जो इसे सौरमंडल के सबसे आकर्षक खगोलीय पिंडों में शामिल करते हैं। इसी विशेषता के कारण इसे ‘वलयों का सम्राट’ भी कहा जाता है।
खगोलविद ने बताया कि शनि के 293 चंद्रमाओं की कक्षाएं प्रमाणित हो चुकी हैं। इनमें से 13 चंद्रमाओं का व्यास 30 मील (लगभग 50 किलोमीटर) से अधिक है।
बिना दूरबीन के भी देख सकेंगे शनि
अमर पाल सिंह ने बताया कि शनि को देखने के लिए विपक्ष स्थिति वर्ष का विशेष अवसर होती है। इसे बिना किसी दूरबीन या अन्य उपकरण के नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है। हालांकि, इसके सुंदर वलयों को स्पष्ट रूप से देखने के लिए दूरबीन की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाली दूरबीन को स्थिर रखकर देखने पर शनि एक चमकदार अंडाकार पिंड के रूप में दिखाई देता है। साफ मौसम, कम प्रकाश प्रदूषण और सही दिशा की जानकारी होने पर छह इंच की घरेलू दूरबीन से भी इसके वलयों को देखा जा सकता है।
अंधविश्वास नहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत
खगोलविद अमर पाल सिंह ने शनि ग्रह को लेकर समाज में प्रचलित अंधविश्वासों से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी खगोलीय घटना को लेकर बिना वैज्ञानिक प्रमाण के धारणा नहीं बनानी चाहिए। किसी भी जानकारी को स्वीकार करने से पहले उसे जानना, समझना और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर परखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वैज्ञानिक चेतना के विकास से ही समाज में व्याप्त अंधविश्वासों को दूर किया जा सकता है। खगोल एवं अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी जानकारी के लिए विशेषज्ञों के प्रमाणित तथ्यों पर भरोसा करना चाहिए और भ्रामक सूचनाओं से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 4 अक्टूबर की रात यदि किसी कारणवश लोग शनि, चंद्रमा, मंगल, बृहस्पति या अन्य तारों को नहीं देख पाते हैं, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। शनि की विपक्ष स्थिति को छोड़कर अन्य खगोलीय पिंडों का दृश्य 7 अक्टूबर तक समय, दिशा और स्थिति में बदलाव के साथ देखा जा सकेगा।
अंत में उन्होंने कहा, “सही ज्ञान, सभी समस्याओं का समाधान और यही है विज्ञान।”




