6–7 मई की रात दिखेगा उल्कावृष्टि का अद्भुत नज़ारा, हैली धूमकेतु के कणों से होगी ‘उल्का बारिश’

महराजगंज।(न्यूज पैच)। खगोल विज्ञान के रोमांच से भरी दुनिया में एक बार फिर आसमान अद्भुत नज़ारा पेश करने जा रहा है। 6–7 मई 2026 की दरमियानी रात ईटा एक्वारिड्स उल्का वर्षा अपने चरम (Peak) पर होगी, जिससे आकाश में चमकीली उल्काओं की बारिश दिखाई देगी।
खगोलविद अमर पाल सिंह (वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर) के अनुसार यह उल्का वर्षा प्रसिद्ध हैली धूमकेतु (1P/Halley) के छोड़े गए धूल व चट्टानी कणों के कारण होती है। जब पृथ्वी इन कणों के मार्ग से गुजरती है, तो वे वायुमंडल में प्रवेश कर जलते हैं और आकाश में चमकीली लकीरों के रूप में दिखाई देते हैं।
तेज़ रफ्तार से चमकेंगी उल्काएं
इन उल्काओं की गति लगभग 66 किमी प्रति सेकंड तक होती है, जिससे ये आकाश में लंबी और चमकीली लकीरें बनाती हैं। कई बार ये “पर्सिस्टेंट ट्रेन्स” यानी कुछ समय तक दिखने वाली रोशनी की धारियां भी छोड़ती हैं।
कितनी उल्काएं दिखेंगी?
भारत में अनुकूल परिस्थितियों (अंधेरा और साफ आकाश) में
👉 10–30 उल्काएं प्रति घंटा
👉 अत्यंत अनुकूल स्थिति में 40–50 उल्काएं प्रति घंटा तक देखी जा सकती हैं।
देखने का सही समय
6 मई रात 2:00 बजे से 7 मई सुबह 4:30 बजे तक
इस दौरान कुंभ (Aquarius) राशि आकाश में ऊँचाई पर होगी, जो इस उल्का वर्षा का रेडिएंट पॉइंट है।
भारत में भी दिखेगा शानदार नज़ारा
हालांकि यह उल्का वर्षा दक्षिणी गोलार्ध में ज्यादा स्पष्ट होती है, लेकिन भारत में भी इसका अच्छा दृश्य देखा जा सकेगा, खासकर भोर से पहले।
कैसे देखें उल्का वर्षा
शहर की रोशनी से दूर किसी अंधेरी जगह पर जाएं
आंखों को अंधेरे में एडजस्ट होने के लिए 15–20 मिनट दें
पूर्व–दक्षिण दिशा की ओर देखें
किसी दूरबीन की जरूरत नहीं, नंगी आंखों से भी देख सकते है।
हैली धूमकेतु से जुड़ा है यह नज़ारा
यह उल्का वर्षा हैली धूमकेतु के मलबे से होती है, जिसका परिक्रमण काल लगभग 76 वर्ष है और यह अगली बार 2061 में दिखाई देगा।
खगोल प्रेमियों के लिए खास मौका
यदि मौसम साफ रहा, तो यह उल्का वर्षा आम लोगों और खगोल प्रेमियों के लिए एक शानदार और दुर्लभ प्राकृतिक दृश्य साबित होगी।
आर्यन श्रीवास्तव
महराजगंज




