
उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के IAS अधिकारी Rinku Singh Rahi ने अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
अपने इस्तीफे में उन्होंने दावा किया है कि लंबे समय से उन्हें कोई जिम्मेदारीपूर्ण पोस्टिंग नहीं दी जा रही थी और उन्हें “साइडलाइन” कर दिया गया था।
क्यों दिया इस्तीफा?
रिंकू सिंह राही ने अपने विस्तृत इस्तीफा पत्र में कई गंभीर आरोप लगाए—
लंबे समय से कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई
बिना काम के सिर्फ वेतन मिलता रहा
जनसेवा का अवसर नहीं दिया गया
उन्होंने इसे “नैतिक निर्णय” बताते हुए कहा कि बिना काम के पद पर बने रहना उचित नहीं है।
“सिस्टम में समानांतर व्यवस्था” का आरोप
IAS अधिकारी ने अपने पत्र में प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए—
उन्होंने कहा कि सिस्टम में एक “पैरेलल व्यवस्था” काम कर रही है
ईमानदार और सक्रिय अधिकारियों को काम करने का मौका नहीं मिलता
योग्य अधिकारियों को जानबूझकर किनारे किया जाता है
यह आरोप यूपी प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
SDM कार्यकाल के बाद हुए साइडलाइन
रिपोर्ट्स के अनुसार—
राही ने शाहजहांपुर में SDM रहते हुए सख्त कार्रवाई की थी
एक विवाद (उठक-बैठक वीडियो) के बाद उन्हें हटा दिया गया
इसके बाद उन्हें राजस्व परिषद, लखनऊ से अटैच कर दिया गया
तब से उन्हें कोई सक्रिय या महत्वपूर्ण भूमिका नहीं मिली।
100 करोड़ घोटाले का खुलासा, झेली थी जानलेवा हमला
रिंकू सिंह राही का नाम पहले भी सुर्खियों में रह चुका है—
उन्होंने करीब 100 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश किया
इसके बाद उन पर हमला हुआ और उन्हें कई गोलियां मारी गईं
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने लड़ाई जारी रखी
उनकी छवि एक ईमानदार और संघर्षशील अधिकारी की रही है।
संघर्ष से IAS तक का सफर
पहले PCS अधिकारी रहे
बाद में UPSC पास कर IAS बने
2022 बैच में चयन हुआ
40 वर्ष की उम्र में IAS बनने का उदाहरण
उनकी कहानी प्रशासनिक सेवा में संघर्ष और साहस की मिसाल मानी जाती है।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल—
सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है
इस्तीफा स्वीकार होगा या नहीं, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं
मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर चर्चा में है
बड़े सवाल
इस इस्तीफे ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या ईमानदार अधिकारियों को सिस्टम में पर्याप्त मौका मिल रहा है?
क्या प्रशासनिक ढांचे में सुधार की जरूरत है?
क्या यह मामला अन्य अधिकारियों के लिए भी संकेत है?
IAS रिंकू सिंह राही का इस्तीफा केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालों का संकेत भी है।
जहां एक ओर यह एक अधिकारी के सिस्टम से मोहभंग की कहानी है, वहीं दूसरी ओर यह शासन व्यवस्था की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर भी बहस छेड़ता है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है।




