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कानपुर में किडनी रैकेट का बड़ा खुलासा: 10 लाख में खरीदी किडनी, 90 लाख में बेची, डॉक्टर-बिचौलिये हिरासत में

पुलिस को शक है कि यह एक संगठित नेटवर्क है, जिसमें अस्पताल, डॉक्टर और बिचौलिये शामिल हैं।

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक चौंकाने वाला किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट सामने आया है, जहां गरीब लोगों को लालच देकर उनकी किडनी बेहद कम कीमत पर खरीदी जा रही थी और फिर उसे कई गुना ज्यादा रकम में बेचा जा रहा था।

जांच में सामने आया है कि उत्तराखंड के एक युवक से करीब 10 लाख रुपये में किडनी लेकर उसे बिहार की एक महिला को लगभग 90 लाख रुपये में बेच दिया गया।

 

10 लाख में सौदा, 90 लाख में ट्रांसप्लांट

इस पूरे मामले में बेहद चौंकाने वाला आर्थिक अंतर सामने आया—

डोनर को लालच देकर 10 लाख रुपये में तैयार किया गया

बाद में वही किडनी मरीज को 90 लाख रुपये से अधिक में बेची गई

 

हालांकि, डोनर को पूरी रकम भी नहीं मिली। उसे केवल कुछ हिस्सा ही दिया गया, जबकि बाकी पैसे के लिए उसे टालते रहे।

 

प्राइवेट अस्पतालों की भूमिका संदिग्ध

जांच में कई प्राइवेट अस्पतालों की भूमिका सामने आई है—

रावतपुर और कल्याणपुर क्षेत्र के अस्पतालों में ऑपरेशन

अलग-अलग अस्पतालों में मरीज और डोनर को शिफ्ट किया गया

रिकॉर्ड छिपाने के लिए सुनियोजित तरीके अपनाए गए

 

पुलिस को शक है कि यह एक संगठित नेटवर्क है, जिसमें अस्पताल, डॉक्टर और बिचौलिये शामिल हैं।

डॉक्टर दंपती और बिचौलिये हिरासत में

कार्रवाई के दौरान—

एक डॉक्टर दंपती को हिरासत में लिया गया

बिचौलियों और अस्पताल संचालकों से पूछताछ जारी

कई जगहों पर छापेमारी कर दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं

 

जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के और बड़े लिंक तलाशने में जुटी हैं।

ऐसे चलता था पूरा खेल

जांच में सामने आया पूरा मॉडस ऑपेरेंडी—

गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसे का लालच दिया जाता था

उन्हें बताया जाता कि किडनी किसी रिश्तेदार के लिए ली जा रही है

ऑपरेशन के बाद पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट

इस पूरे नेटवर्क में डोनर की पहचान तक बदल दी जाती थी ताकि मामला छिपा रहे।

 

 50 हजार रुपये के विवाद से खुला राज

इस बड़े रैकेट का खुलासा एक छोटे विवाद से हुआ—

डोनर को तय रकम से 50 हजार रुपये कम मिले

बार-बार पैसे के लिए टालने पर उसने पुलिस में शिकायत कर दी

इसी शिकायत से पूरे गिरोह का पर्दाफाश हुआ

 

इंटर-स्टेट नेटवर्क की आशंका

जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि—

यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि बड़ा नेटवर्क हो सकता है

उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार तक फैला कनेक्शन

कई अन्य ट्रांसप्लांट मामलों की भी जांच जारी

 क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

ऐसे मामलों को बेहद गंभीर अपराध माना जाता है क्योंकि—

यह मानव अंगों की अवैध तस्करी है

गरीब लोगों का शोषण होता है

मेडिकल सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं

 

कानपुर का यह किडनी रैकेट मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चेतावनी भी है।

जहां एक तरफ गरीब लोगों को लालच देकर उनका शोषण किया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ करोड़ों का अवैध कारोबार चल रहा था।

अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे बड़े चेहरों तक कब पहुंचती हैं।

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